नई गीत – अंजना सिन्हा

तुम हृदय की वेदना को क्या समझ पाये कभी।

पास आकर दर्द मेरा यार सहलाये कभी।।

मैं निरंतर आंधियों के वेग से लड़ती रही

और सामाजिक प्रथा की गूंज को सहती रही

आंख के आंसू छुपे कर्तब्य के पयदान पर

आंच आने ही नहीं दी मैं तुम्हारे मान पर

कृत्य पर अपने बताओ तुम भी शरमाये कभी।

तुम हृदय की वेदना को क्या समझ पाए कभी।।

शीत गर्मी और वर्षा के थपेड़े खा लिए

साथ तेरे हम तो सदियों के झमेले पा लिए

मान मर्यादा बचाई और सब सुख छोड़ दी

ज़िन्दगी की हर ख़ुशी मैंने मुंह को मोड़ दी

वेवफा मेरी ब्यथा पर क्या तरस खाते कभी

तुम हृदय की वेदना को को क्या समझ पाए कभी।।

दर्द किसको मैं सुनाऊं स्वार्थ के संसार में

भेड़ियों की हैं निगाहें आज बस व्यभिचार में

कौन अपना है जिसे कहकर पुकारुं प्यार से

टूटता विश्वास हर पर जगत के ब्यवहार से

सच बता दो क्या मुझे तुम अपना कह पाये कभी

तुम हृदय की वेदना को क्या समझ पाए कभी।।

अंजना सिन्हा “सखी ”

रायगढ़

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *