ड्रमंडगंज, मीरजापुर। तेंदुए के खौफ से जी रहे ग्रामीणों को राहत मिल गई है। कानपुर से आई वन विभाग की टीम में काफी मशक्कत करते हुए तेंदुए को पिंजरे में कैद कर लिया है। हलिया वनरेंज के बेलाही गांव के बरहवा मजरे में बुधवार को शाम तेंदुआ गांव निवासी श्रवण कुमार कोल को घायल करते हुए घर में घुस गया था। जिसको निकालने के लिये जिले व काशी प्रांत सहित हलिया वन रेंज, घोरावल, ड्रमंण्डगंज के वन कर्मचारियों ने 12 बजे रात तक अथक प्रयास किया, लेकिन तेंदुए को पिजरे में कैद नहीं कर पाए। कानपुर से आई रेस्क्यू टीम ने 20 घंटे बाद डेढ बजे रात ट्रांकुलाइज कर तेंदुए को कैद किया है। तब जा कर अधिकारियों व ग्रामीणों ने राहत की सास ली है। कानपुर प्राणी उद्यान से आए टीम प्रभारी डा नासीर, डा रिसभ अग्निहोत्री, वन्यजीव विशेषज्ञ अविरल पाल ने गन द्वारा ट्राइकुलाइजेशन किया। इसके बाद जाल में लपेट कर तेंदुए को पिजरे में कैद कर ट्रक पर लाद कर दिघिया रेंज कार्यालय पर रखा गया है। जहां पर उच्च अधिकारियों से अनुमति मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
डा नासिर ने बताया कि तेंदुआ का वजन 50 किलो है वह लगभग चार, पांच वर्ष का है। तेंदुआ नर है व सुरक्षित है। कहीं कोई चोट नहीं आई है। सुबह खाने के लिये मुर्गा और पानी दिया गया है। डीएफओ तापस मिहिर ने बताया कि उच्च अधिकारियों के अनुमति के बाद इसे चिड़िया घर या सुरक्षित वन क्षेत्र में भेजा जाएगा। खबर लिखे जाने तक पिजरे में बंद कर चारों तरफ से कम्बल से घेर कर ट्रक पर रखा गया है। तेंदूआ आदमी की भनक लगते गुर्राने लगता है जिससे उसके पास चारो तरफ वनकर्मियो का पहरा लगा हुआ है। मौके पर डीएफओ सहित वनकर्मी मौजूद है। बताते चलें कि बेलाही गांव निवासी चालीस वर्षीय श्रवण कुमार भोर में घर से बाहर लघुशंका करने के लिये निकले थे कि पहले से बाहर मौजूद तेंदुआ ने उनके बाएं पैर में हमला कर दिया। शोरगुल होने पर तेंदुआ घर के भीतर घुस गया। इसकी सूचना ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान लाल बहादुर पाल को दी। ग्राम प्रधान वन विभाग व पुलिस को सूचना देते हुए मौके पर पहुंच कर सुबह 6 बजे से तेंदुए को पकड़े जाने तक टीम कार्यवाही में जुटी रही।
गृहस्वामी श्रवण कुमार व पिता कमला पत्नी शकुंतला तथा सोलह वर्षीय बेटा विकास, दस वर्षीया बेटी पुनम तथा आठ वर्षीया बेटी खुशबू एक दिन व एक रात अपना घर छोड़ कर दूसरे के घर में रह कर विताया। श्रवण कुमार मेहनत मजदूरी कर जीवन यापन करता है। तेंदुए को बाहर आने के बाद दवा इलाज के लिये वन विभाग ने पांच हजार रुपये देते हुए मुल्यांकन के बाद अनुग्रह राशि देने को कहा है। इस मौके पर डीएफओ तापस मिहिर, काशी प्रांत वन्य जीव प्रभारी दिलीप श्रीवास्तव, एसो हलिया विष्णु प्रभा सिंह, वन क्षेत्राधिकारी अवध नारायण मिश्र, रेंजर ड्रमंण्डगंज बी के तिवारी, घोरावल से सुरजू प्रसाद, डिप्टी रेंजर सीपी तिवारी, बेलाही प्रधान कमलेश आदि लोग मौजूद रहे।