बस्ती । गंगाजी का किनारा भक्ति का घाट है और केवट भगवान का परम भक्त है, किंतु वह अपनी भक्ति का प्रदर्शन नहीं करना चाहता था। अतरू वह भगवान से अटपटी वाणी का प्रयोग करता है। केवट ने हठ किया कि आप अपने चरण धुलवाने के लिए मुझे आदेश दे दीजिए, तो मैं आपको पार कर दूंगा केवट ने भगवान से धन-दौलत, पद ऐश्वर्य, कोठी-खजाना नहीं मांगा। उसने भगवान से उनके चरणों का प्रक्षालन मांगा। केवट की नाव से गंगा पार करके भगवान ने केवट को उतराई देने का विचार किया। सीता जी ने अर्धागिनी स्वरूप को सार्थक करते हुए भगवान की मन की बात समझकर अपनी कर-मुद्रिका उतारकर उन्हें दे दी। भगवान ने उसे केवट को देने का प्रयास किया, किंतु केवट ने उसे न लेते हुए भगवान के चरणों को पकड़ लिया। जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है, ऐसे भगवान के श्रीचरणों की सेवा से केवट धन्य हो गया। भगवान ने उसके निस्वार्थ प्रेम को देखकर उसे दिव्य भक्ति का वरदान दिया तथा उसकी समस्त इच्छाओं को पूर्ण किया।यह सद् विचार कथा व्यास रूद्रनाथ मिश्र ने श्रीराम जानकी मंदिर निपनिया चौराहा में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के निमित्त दसकोलवा में आयोजित 9 दिवसीय श्री शिव शक्ति महायज्ञ और श्रीराम कथा में व्यक्त किया।
कथा व्यास अंकित दास ने श्रीराम विवाह, परशुराम प्रसंग और अयोध्या वापसी के अनेक प्रसंगो का विस्तार से वर्णन करते हुये महात्मा जी ने कहा कि मिथिलानरेश के लिये सौभाग्य की बात है श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का विवाह एक ही मण्डप में सम्पन्न हुआ। विदाई का क्षण आया, साक्षात महालक्ष्मी सीता जी जनकपुरी छोड़कर जा रही है, मेरे जाने के बाद इन लोगों का क्या होगा ऐसा सोच माता जी ने अपने आंचल में चावल भरकर चारो ओर बिखेर दिये। आज भी मिथिला में चावल बहुत पकता है। महात्मा जी ने कहा कि परमार्थ में यदि कोई भूल हो जाय तो भगवान शायद क्षमा कर देते हैं किन्तु व्यवहार की छोटी सी भूल भी लोग क्षमा नहीं करते। व्यवहार बड़ा कठोर है। इससे सावधान रहना चाहिये।
यज्ञाचार्य नीरज शास्त्री ने प्राण प्रतिष्ठा वाली मूर्तियों को अन्न, फल, वस्त्र में अधिवास कराकर स्नान कराने के बाद यज्ञ महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
ब्रम्हलीन बाबा महादेव दास की स्मृति में आयोजित 9 दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठान में मुख्य रूप से प्रभात शास्त्री, आशुतोष दास, आदित्यदास, नीरज दास, ऋतिक दास, ओम नरायन, संगम शुक्ल, मुख्य यजमानगण दयाशंकर, राजकुमारी, नागेन्द्र मिश्र , राम सोहरत, शान्ती देवी, कौशल कुमार, कुसुम, सुनील पाण्डेय, मीरा देवी, सुल्ताना बाबा, सरोज मिश्र के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त शामिल रहे।