नई ग़ज़ल

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हुआ प्यार का ये असर धीरे धीरे।।

खिंचे जा रहे हम उधर धीरे धीरे।।

 

गए पास उनके तो जाने हुआ क्या,

धड़कने लगा ये जिगर धीरे धीरे।।

 

तसल्ली बमुश्किल मिली दिल को मेरे,

शुरू ये हुआ जब सफ़र धीरे धीरे।।

 

वो पहलू में आ के शरमाए यूँ हैं,

उठा फिर गिराते नज़र धीरे धीरे।।

 

बिखेरी थीं ज़ुल्फ़ें पुरवा ने उनकी,

वो फिर फिर सँवारें मगर धीरे धीरे।।

 

हुआ मुद्दतों से जो मुहब्बत में मिलना,

ये तन मन रहा है निखर धीरे धीरे।।

 

मुहब्बत ‘सखी जो’ सच्ची मिले तो,

मेरी रूह जाए सँवर धीरे धीरे।।

 

अंजना सिन्हा ‘सखी’

रायगढ़

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