इंदौर, मार्च(आरएनएस)। फैमिली कोर्ट ने पीडि़त पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पत्नी द्वारा मांग में सिंदूर नहीं भरना क्रूरता माना है। फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश एनपी सिंह ने पीडि़त पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा है कि सिंदूर एक विवाहिता पत्नी का धार्मिक दायित्व है। उससे मालूम पड़ता है कि महिला विवाहित है। पीडि़त पति की ओर से अधिवक्ता शुभम शर्मा के मुताबिक न्यायालय के समक्ष पीडि़त पति द्वारा हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा नौ के तहत दाम्पत्य संबंधों को पुन: स्थापना हेतु प्रकरण प्रस्तुत किया गया था। पीडि़त पति का पत्नी द्वारा पांच वर्ष से बेवजह परित्याग कर रखा था। पत्नी द्वारा पीडि़त पति पर शराब पीने, गांजा पीने, सट्टा खेलने, घूंघट कराने के साथ मारपीट और दहेज की मांग के साथ ही गृहस्थी के दौरान घर खर्च नहीं देने एवं डंडों से मारपीट करने जैसी कई गंभीर आरोप पति पर लगाए थे। कोर्ट के समक्ष खंडन करते हुए न्यायालय को वास्तविकता बताई गई। इससे न्यायालय ने सहमत होकर पति के पक्ष में आदेश पारित कर पत्नी को तत्काल प्रभाव से पति के पास लौटने एवं साथ में निवास करने का आरोप पारित किया।