

अनुराग लक्ष्य, 15 मार्च
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
बदलाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, इसे होना भी चाहिए। क्योंकि जब जब हम किसी अच्छे उद्देश्य के लिए समाज में किसी बदलाव का बीड़ा उठाते हैं तो हमें किसी भी चीज को और मजबूती के साथ बेहतर बनाने की प्रेरणा भी मिलती है। शायद इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु मुख्य मंत्री एकनाथ शिंदे ने यह कदम उठाया होगा। ज़ाहिर सी बात है कि अगर रेल्वे स्टेशन के नाम बदले जा रहे हैं तो उन स्टेशनों को और बेहतर बनाने की योजना भी ज़रूर होगी।
खैर, इस बात का तो हम सिर्फ कयास ही लगा सकते हैं। सच्चाई क्या है यह तो मान्यवर मुख्य मंत्री एकनाथ शिंदे जी ही बेहतर जानते होंगे। फिलहाल मुंबई के आठ रेलवे स्टेशन के नाम बदले जाने की खबर बिलकुल सच्ची है। जिसमें पहला नाम मुम्बई सेंट्रल का है जो अब सर जगन्नाथ शंकर सेठ के नाम से जाना और पहचाना जायेगा।
दूसरे नंबर पर आता है मरीन लाइन जो भविष्य में मुंबा देवी स्टेशन के नाम से जाना जाएगा।
इसी तरह तीसरे नंबर पर आता है चरनी रोड जो अब गिरगांव स्टेशन के नाम से जाना जाएगा। चौथे नंबर पर आता है करी रोड़ जो अब लाल बाग के नाम से जाना और पहचाना जायेगा। इसी तरह पांचवे स्थान पर आता है संडस रोड़ जो डोंगरी स्टेशन के नाम से जाना जाएगा।
इसी तरह छटे नंबर पर कॉटन ग्रीन का नाम बदलकर काला चौकी स्टेशन रखा जाएगा । साथ ही सातवें स्थान पर आता है डोक्यार्ड रोड़ स्टेशन जो भविष्य में मझगांव स्टेशन के नाम से जाना जाएगा। और आखिर में आठवें नंबर पर आता है किंग सर्कल जो अब तिरथकर पार्श्वंथ स्टेशन के नाम से जाना और पहचाना जायेगा।