अनुराग लक्ष्य, 13 मार्च
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
सियासत के परिंदों की अदाकारी का क्या कहना, यहां कब और कैसे हालात पैदा हो जाएं, कहना ज़रा मुश्किल है।
आपको बताते चलें कि महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी के घटक दलों के बीच टिकटों को लेकर एक दिलचस्प मोड़ आ गया है। वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता परकश अंबेडकर ने दावा किया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी/शरद पवार/ और शिवसेना UBT के नेताओं ने यह आश्वासन लिखित में देने से इंकार कर दिया है कि आगामी लोकसभा चुनावों के बाद वोह बी जे पी और आर एस एस के साथ नहीं जायेंगें। परकाश अंबेडकर के इस दावे से महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल सा आ गया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता जितेन्द्र आहवाड़ को लिखे पत्र में परकाश अंबेडकर ने चौकाने वाले दावे भी किए हैं। उन्होंने लिखा है कि सीट शेयरिंग पर एमवीए की बैठक में जब हमारे प्रतिनिधियों ने कहा कि ,हमें मतदाताओं को यह भरोसा दिलाना होगा कि चुनाव के बाद हम बी जे पी या आर एस एस के साथ नहीं जायेंगें, तब आपके सभी नेता खामोश क्यों बैठे रहे। वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता ने पत्र में आगे यह भी लिखा कि उन्होंने एक तरह से इस परस्ताव को का मौन विरोध किया।
आपको फिर एकबार बतादें कि अगले कुछ ही दिनों में लोकसभा चुनाव को लेकर सीटों के बटवारे का होना तय है लेकिन अभी तक महाराष्ट्र के विपक्षी गठबंधन में टिकटों का बंटवारा नहीं हो पाया है , बल्कि परकाश अंबेडकर को भी सीटें देने पर स्थिति साफ नहीं दिखाई पड़ रही है। यही वोह सारे मुद्दे हैं जिनकी वजह से परकाश अंबेडकर की सनसनी खेज बयान पर महाराष्ट्र की सियासत में उथल पुथल की स्थिति उत्पन्न हुई।