मेरा तुम्हारा है,अनोखा बंधन.
हृदय का हृदय से मिलन.
है अटूट यह गहरा रिश्ता.
जैसे राधा कृष्ण का प्रेम अर्चन.
बिन बांधे बना यह बंधन.
ऐसी हमें लागी मीठी लगन.
सिर्फ पाना ही मकसद नहीं.
मौन में भी हो सुमिरन.
प्रेम बगैर होता अधूरा जीवन.
आओ मिल सैर करें मधुबन.
सदा झूठ फरेब से दूर.
खुशी रहे ना हो उलझन.
अलग अंदाज वाले मेरे सजन.
देते हो तुम प्यारा चुभन.
हर अरमान पूरे करते हो.
इश्क में बनी मैं जोगन.
तत्वदर्शी रचनाकार
डॉ अर्चना श्रेया