ग़ज़ल
किस-किस को बताएं यहां किस हाल में हम हैं।
उलझी हुई है जिंदगी जंजाल में हम हैं।।
जीवन में भला किस तरह मिल पाएंगे उन से।
आकाश में रहते हैं वो पाताल में हम हैं।।
क्यूँ सर्द हवाएं हमें सोने नहीं देतीं।
क्या शह् रे मुलाक़ात के गढ़वाल में हम हैं।।
बदले है कहां देश के हालात अभी तक।
जिस हाल में पहले थे,उसी हाल मे हम हैं।।
गुम गो गए जिस रोज़ से लफ्जों के सफ़र में।
उस दिन से मोहब्बत के भंवर जाल में हम हैं।।
विनोद उपाध्याय हर्षित