७५वां गणतंत्र देश परतंत्र-आचार्य सुरेश जोशी

🚩🚩 ओ३म् 🚩🚩
७५वां गणतंत्र देश परतंत्र
२२जनवरी को राम लला अयोध्या में आ गए और २६ जनवरी को ७५ वां गणतंत्र मनाया गया मगर न तो अभी राम राज्य आया।न देश आजाद हुआ। जी । मेरे इस कथन को न मजाक समझना,न हल्के में लेना। मैं अपनी बात को प्रमाण के साथ रखता हूं। भारत के मनीषियों, ऋषियों, राष्ट्र भक्तों, निष्काम समाजसेवियों से से निवेदन है कि यह लेख चिंतनीय, विचारणीय , अनुकरणीय,प्रसारणीय है।
🇮🇷 स्वतंत्रराष्ट्रकेतीनलक्षण 🇮🇷
(१) राष्ट्रीय संविधान नागरिकों के अनुसार होता है:- हमारे देश
में ऐसा नहीं है। अनुच्छेद ३३३ के तहत बहुमत की सरकार होने पर भी राष्ट्रपति द्वारा नामित दो अंग्रेज आज भी लोकसभा के अंदर बैठते हैं।३४.७३५ कानून आज भी नागरिक गुलामी के प्रतीक हैं । सन् १८४०में लार्ड मैकाले ने देश को सदा गुलाम बनाने के लिए सुनियोजित पाठ्यक्रम चलाए। जिनमें 🌸 एन्थ्रोकौलोजी 🌸 इंजीनियरिंग 🌸 इतिहास मिश्रण🌸नकली मनुस्मृति मुख्य थे।इसी प्रकार कानूनी तौर पर कुछ एक्ट बनाए उदाहरण के लिए देखें।
🌻 इंडियन एजूकेशन एक्ट🌻
इस कानून के आधार पर संस्कृत पढ़ाने वाले गुरुकुलों पर प्रतिबंध लगा दिया। सन् १८६८ तक इंग्लैंड (यूरोप) में एक भी सामान्य स्कूल नहीं था। जबकि १८२२ तक पूरे भारत में ७.३२०० गुरुकुल थे। इतने ही गांव गांव उस समय भारत में थे। यानि हर गांव में एक गुरुकुल था। साक्षरता ९७% थी।पूरी शिक्षा निशुल्क होती थी।वेद, दर्शन, विज्ञान, गणित, चिकित्सा,कुल ६४ प्रकार की विद्याएं पढ़ाई जाती थी।इस एक्ट के तहत गुरुकुलों के आचार्यों को उनके घरों में जला दिया जाता था।हाथ पैर काट दिए। गुलाम बनाने के दो नियम थे।
(१) मारो,पीटो,लूटो और ताकत से गुलाम बनाओ।
(२) पहला नियम सदा लागू नहीं हो सकता इसलिए कानून बनाकर लूटो।
इसी तरह 🍁 इंडियन पुलिस एक्ट 🍁 इंडियन फोरेस्ट एक्ट🍁 इंडियन एबियट एक्ट🍁 आई पी सी 🍁 आदि ये कानून ये सब अंग्रेज़ो के बनाए कानून ही आज भी चल रहे हैं फिर ये कैसी स्वतंत्रता? मजेदार बात तो यह है कि ये कानून सब 🌴 आयरलैंड 🌴 के हैं।भारत से पहले अंग्रेजों ने 🌴 आयरलैंड 🌴 को गुलाम बनाया था। आयरलैंड के ही कानून इंडिया में लागू कर दिये।
(२) 🌲 भाषा की गुलामी 🌲
जो देश स्वतंत्र होता है उसकी अपनी मातृ भाषा ही उसके राष्ट्र भाषा होती है।क्या ७५ वें गणतंत्र दिवस पर भी हम हिंदी को राष्ट्र भाषा बना पाए? फिर कैसी स्वतंत्रता?
हमारा संविधान १९४७ के बाद लिखा गया और १९५९ में लागू हुआ। मगर संविधान अंग्रेज़ो का🪷 संसदीय लोकतंत्र भी अंग्रेज़ो का🪷 न्याय व प्रशासनिक व्यवस्था अंग्रेजों की।
भारतीय संविधान अनुच्छेद ३४३(१) में स्पष्ट कहा है कि भारतीय संघ की राजभाषा (देवनागरी लिपि) हिंदी में होगी। अनुच्छेद ३४३(२) के उस प्राविधान की अवधि को अनावश्यक रूप से लंबा क्रिया जा रहा है। जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि राज कार्यों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग केवल १५ वर्ष तक होगा। अनुच्छेद २५१ में कहा कि हिन्दी भाषा का का प्रचार प्रसार वृद्धि उसका विकास करना ताकि वह भारत की सामाजिक, संस्कृति सब तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम हो सके मगर आज तक नहीं हुआ।
भारत को छोड़कर दुनिया के किसी भी देश में विदेशी भाषा में अखबार नहीं छपता।भारत को छोड़ दुनिया का कोई भी देश विदेशी भाषा में अपने बच्चों को शिक्षा नहीं देता। कुछ अखबार विदेशी भाषा में छपते भी हैं तो विकते नहीं। भारत में आज भी विज्ञापन अंग्रेज़ी में छपते हैं।
भारत के नेता व नीति निर्धारक अधिकतर लोग अंग्रेज़ी अख़बार पढ़ते हैं उसी से प्रभावित होकर नीतियां भी बनाते हैं
अदालतों में वादी-प्रतिवादी के लिए आज भी अंग्रेजी जरूरी है। इसलिए अंग्रेजी न जानने के कारण दलाल रखने पड़ते हैं। किसानों के बीज के पैकेट,दवाओं के नाम भी अंग्रेजी में हैं।
💐 आंदोलन चाहिए 💐
जैसे अंग्रेज़ो को उखाड़ फेंका ठीक उसी प्रकार तरह अंग्रेज़ी को उखाड़ने के लिए आंदोलन होना चाहिए।हमारी 🧘 शिक्षा 🧘शासन 🧘 कारखानों 🧘 अदालतों 🧘 फौज 🧘 वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्रों से अंग्रेजी हटानी होगी। सन् १९६८ के संसोधन को हटाना होगा कि एक भी राज्य अंग्रेजी का समर्थन करें तो अंग्रेजी जारी रहेगी तथा १९६८ के संशोधन को भी हटाना होगा कि एक भी राज्य अंग्रेजी का समर्थन करें तो अंग्रेजी जारी रहेगी। अनुच्छेद ३४३ में संसोधन तभी होगा जब २२ जनवरी की तरह पूरा देश एक साथ आंदोलन करेगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो फिर श्रीराम मंदिर बनाना भी काम नहीं आयेगा।
🐂 गो हत्या/शराब बंदी 🐂
यह गुलामी की तीसरी निशानी है कि जिस देश में 🐂 गाय🐂 को माता का दर्जा दिया जाता है वहां सरकारें डीजल/पेट्रोल के लिए गो हत्या कराती है और मांस का निर्यात करती है।यह कैंसी आजादी? और कैसा गणतंत्र?
अंग्रजों के समय शराब पीने की न्यूनतम आयु १४ की थी आज १८ कर दी ये कैसा मजाक? अंग्रजों ने कानून बनाया कि मंदिर के ५०० मीटर तक शराब की दुकान न हो मगर आज तो लोग मंदिरों में भी शराब पीकर जाते हैं।ये कैंसी आजादी ?
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जंगे आजादी लड़ी जब,
तब सपने कुछ और थे!
हाल अपना आज जो है
वो कभी सोचा भी न था।
🟣 उठो!जागो!करो!!!🟣
सरकारों के भरोसे बैठकर देश नहीं जगता। सरकार तो अंग्रेजो की २५० वर्ष होने पर भी नहीं टिकी।आज तो सरकारें ५-१०-१५ साल चलती हैं।जनता को जागना होगा।जब तक 🟣 हिंदी राष्ट्र भाषा नहीं होती 🟣जब तक गो-हत्या पल पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगता🟣जब तक नेता व कानून निर्माता मांसाहारी व शराबी🟣 होंगे।तब तक न भारत स्वतंत्र होगा न ही 🏹 रामराज्य 🏹आयेगा। इसके लिए जन आंदोलन ही एकमात्र विकल्प है।
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कर सको तो अपनी वाणी में वो
असर पैदा करो!
रुख हवाओं का बदल दो वो
हुनर पैंदा करो!
जीना चाहते हो इस देश में सम्मान से!
तो हर घर में एक आर्य पैंदा करो!!
आचार्य सुरेश जोशी
🌹 वैदिक प्रवक्ता 🌹
आर्यावर्त साधना सदन पटेल नगर दशहराबाग बाराबंकी उत्तर प्रदेश ☎️ 7985414636☎️

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