श्री राम कथा
पिता वचन हित चल दिए त्याग अयोध्या धाम।
जंगल के राजा बने पुरुषोत्तम श्री राम।।
राजपाट कंदुक बना खेल रहे अविराम।
राम फेंकते भरत को भरत फेंकते राम।।
रस्ता रोज बुहारती लिए टोकरी बेर।
आ भी जाओ द्वार पर अब मत करना देर।।
सोने की लंका नहीं नमन अवध की धूल।
हे लक्ष्मण अब घर चलो वही हमारा मूल ।।
सौंप विभीषण राज पद चले अयोध्या देश ।
चरण पादुका चरण में राम बने अवधेश।।
कलियुग में भी आ गए अपने घर में राम।
दोनों हाथों को उठा बोलो जय श्री राम।।
डॉ राजेश कुमार मिश्र
वशिष्ठ नगर बस्ती
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