गज़ल
क्या हुआ जो कि तुम हमारे ना हुए।
शहर में शोर तो है कि हम तुम्हारे हैं।
हृदय से बांध के रखा है तुमने हमको,
और कहते हो कि हम कुंवारे हैं।
जीत के बाजी भी हारे भी तुम ही थे हमसे,
जीत के बाजी भी हम सब कुछ तुम्ही से हारे हैं।
इश्क में लेन और देन का सौदा ज़रा सा मुश्किल है,
तेरे लबों की एक हंसी के लिए पी लिए मैंने अश्क सारे हैं।
अर्चना श्रीवास्तव
शब्द शिल्पी
बस्ती उत्तर प्रदेश