संवाददाता अनुराग उपाध्याय।
बाघराय। भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा जी की मित्रता अटूट रही सुदामा की भक्ति एवं मित्रता सुदामा के समर्पण भाव से की गई भक्ति से ही प्राप्त हुई थी यह बातें सुकुलपुरपचइंया गांव में भागवत कथा का समापन करते हुए स्वामी प्रपन्नाचार्य महराज ने कही उन्होंने कहा कि सुदामा भगवान के बहुत ही प्रिय भक्त वाल्यकाल से ही रहे गुरूकुल में शिक्षा दीक्षा ग्रहण करते समय भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं सुदामा को अपना परम मित्र व भक्त बना लिया था ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण एव सुदामा की भक्ति व मित्रता समाज व देश के लिए एक मिसाल बन गई है आज लोग ऐसे आदर्शों से सीख लें।आचार्य ने भागवत कथा का समापन करते हुए भगवान के अन्य अवतारों व दुष्टों के संहार व धर्म की हमेशा रक्षा करने का विस्तार से वर्णन किया इस मौके पर संयोजक शिवकुमार शुक्ला विवेक शुक्ला व अधिवक्ता विनयकुमार शुक्ला विकास शौर्य व पारसनाथ मिश्र शिवराम मिश्र महरानीदीन तिवारी राजा मिश्र रामगोपाल शुक्ला हरिप्रसाद तिवारी उमाशंकर शुक्ला संदीप शुक्ला हरिकेश रामबिशाल शुक्ला अवधेशानंद महराज अनिल पांडेय दिनेश मिश्र अशोक तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।