अपनों से सजी ये दुनिया कितनी खूबसूरत है
पागलों की जिंदगी जीने के लिए गम की जरूरत है
लोग सिर्फ सुख ही चाहते हैं
यह जीवन का एक हिस्सा है
लोग पागल तो कह देते हैं लोगों को पर पता नहीं पागल भी किसी की जिंदगी का हिस्सा हैं
पागल को पढ़ कर कह देना कि यह एक किस्सा है
तो समझ लेना अधिक बुद्धिमानी भी पागलपन का एक हिस्सा है
पागलों की तरफ से खुशी नसीब हो बुद्धिमानों को
दुआ है खुदा से कभी सहना ना पड़े अपमानों को
कुश्ती है पुरानी मगर दरिया बदल गया
मेरी तलाश का कल से जरिया बदल गया
ना शक्ल बदली ना ही बदला मेरा किरदार
बस कल से लोगों का देखने का नजरिया बदल गया
मुझ जैसा पागल ही है जिससे सब हल मिल सके
तुम जैसा बुद्धिमान ना सही जिससे घुल मिल ना सके
कविता रही अपने हर्षित जी की रहम से
और अजय की कलम से✍️