अनुराग लक्ष्य, 7 नवम्बर।
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
लगभग 6 दशक तक हिंदी फिल्मों में बतौर खूंखार खलनायक के रूप में रंजीत ने जो शोहरत हासिल की, वो किसी की ज़िंदगी में बहुत कम ही नज़र आता है ।
पंजाब में जन्में किशन सिंह बेदी को फिल्मों का भूत कुछ ऐसा सवार हुआ, कि उन्होंने दिल्ली की पढ़ाई छोड़ कर मुंबई आने की जो ठानी तो परिवार के लाख विरोध के बावजूद भी वोह मुंबई आ गए ।
रंजीत हमेशा सुनील दत्त के बहोत बड़े फैन रहे, क्योंकि दत्त साहब ने उन्हें फिल्मों में काम देने के साथ साथ उनका नाम भी बेदी से बदलकर रंजीत रख दिया। यही रंजीत आगे चलकर हिन्दी फ़िल्मों का ऐसा खूंखार विलेन साबित हुआ जिसे देखकर लड़कियाँ डर के मारे अपना रास्ता बदल लिया करती थीं।
आपको बताते चलें कि रंजीत मात्र उन गिने चुने अभिनेताओं में हैं जिन्होंने हमेशा शाकाहारी बनकर फिल्म इंडस्ट्री में अपने सफलता के 6 दशक से भी ज़्यादा वक्त गुज़ारा। शराब और सिगरेट से हमेशा दूर रहे।
आज भी उन्हीं सिद्धांतों पर चलकर कुछ गिनी चुनी फिल्मों में नज़र आ जाते हैं।
ख़ून पसीना, नहले पे दहला, चंबल की क़सम, विश्वनाथ, मेरे अपने, मुकाबला,नागिन, खोटे सिक्के , राजपूत, जैसी ब्लॉक बस्टर फिल्मों सहित सैंकड़ों ऐसी फिल्में हैं जो रंजीत को एक खूंखार खलनायक का दर्जा दिलाती हैं। जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता ।