सुधीर श्रीवास्तव कृत मंथरा काव्य संग्रह

पुस्तक समीक्षा

सुधीर श्रीवास्तव कृत मंथरा (काव्य संग्रह)

 

समीक्षक – महेन्द्र तिवारी

 

1. मुख्य पृष्ठ – पुस्तक का मुख्य पृष्ठ अत्यंत आकर्षक है। मंथरा के प्रतीकात्मक चित्र के साथ रंग संयोजन मनमोहक है जो पाठक को तुरंत अपनी ओर खींचता है।

2. लेखक परिचय – लेखक डॉ. सुधीर श्रीवास्तव जी संस्थान के मीडिया प्रभारी, यमराज मित्र, विनम्रता के परिचायक, बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी एवं प्रसिद्ध व्यंग्यकार हैं। आपकी प्रकाशित कृति ‘यमराज मेरा यार’ चर्चित रही है।

3. प्रकाशन विवरण – यह काव्य संग्रह FlipHtml5 पर डिजिटल रूप में उपलब्ध है। प्रकाशन वर्ष 2024, मूल्य सहयोग राशि पर आधारित है।

4. शुभकामनाएँ – पुस्तक में अनेक वरिष्ठ साहित्यकारों की शुभकामनाएँ हैं जो कृति की प्रामाणिकता को सिद्ध करती हैं।

5. अनुक्रमणिका – अनुक्रमणिका में विविध विषयों पर लगभग 60+ रचनाएँ हैं जो सामाजिक, हास्य-व्यंग्य और पौराणिक चेतना पर आधारित हैं।

6. विषय वैविध्य – मंथरा केवल एक पात्र नहीं, बल्कि आज की कुंठित मानसिकता का प्रतीक है। लेखक ने मंथरा के बहाने आज की राजनीति, समाज और परिवार पर तीखा प्रहार किया है।

7. भाषा-भाव – भाषा सरल, सहज, अवधी मिश्रित खड़ी बोली है। व्यंग्य में भी भाव की गहराई है। विचार सामग्री समसामयिक है।

8. मूल्यांकन – पुस्तक साहित्यिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम है जो पाठक को सोचने पर विवश करती है।

9. गुण-दोष – गुण – मौलिक चिंतन, तीक्ष्ण व्यंग्य। दोष – कहीं-कहीं विस्तार और अधिक हो सकता था।

10. समग्र प्रभाव – समग्र रूप से ‘मंथरा’ एक पठनीय, संग्रहणीय और चिंतनपरक कृति है जो हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण जोड़ है।

 

दिल्ली