नवरात्रि में डॉ. शिखा गोस्वामी ‘निहारिका’ की दो पुस्तकों का प्रकाशन, कुलदेवी माँ महामाया को किया समर्पित
मुंगेली। नवरात्रि के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ की साहित्यकार एवं लेखिका डॉ. शिखा गोस्वामी ‘निहारिका’ द्वारा संपादित दो साहित्यिक पुस्तकों ‘‘नवरंगिनी-भक्ति, शक्ति और सृजन’ और ‘अंबे के आँगन में’ का प्रकाशन हुआ है। दोनों पुस्तकें उनकी कुलदेवी जगत् जननी माँ महामाया को समर्पित हैं। इन साझा संकलनों में देश के विभिन्न रचनाकारों ने अपनी कविताओं एवं साहित्यिक रचनाओं के माध्यम से माँ भगवती के प्रति श्रद्धा, भक्ति और आस्था को अभिव्यक्त किया है। नवरात्रि के शुभ अवसर पर इन पुस्तकों का प्रकाशन साहित्य और आध्यात्मिकता के सुंदर संगम के रूप में देखा जा रहा है।
पुस्तक ‘नवरंगिनी-भक्ति, शक्ति और सृजन’ का प्रकाशन सर्वत्र प्रकाशन एवं पोएटिक एसेंस पब्लिकेशंस द्वारा किया गया है। इसका ISBN नंबर 978-93-48967-01-5 है। वहीं दूसरी पुस्तक ‘अंबे के आँगन में’ वैदिक पब्लिकेशन, हरिद्वार द्वारा प्रकाशित की गई है, जिसका ISBN नंबर 978-81-68068-39-1 है। इन दोनों संकलनों के माध्यम से संपादक ने रचनाकारों को एक साझा मंच प्रदान करते हुए माँ दुर्गा के प्रति अपनी भावनाओं को साहित्य के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर दिया है।
इन पुस्तकों को विशेष बनाने वाली एक और महत्वपूर्ण बात इनमें देश का नाम रोशन करने वाले दो खेल प्रतिभाओं की सहभागिता है। इनमें राजस्थान के विश्व चैंपियन वेटलिफ्टर श्री गोविंद सिंह जी तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीनेश जुरेल जी शामिल हैं, जो राष्ट्रीय स्तर की शूटिंग चैंपियन रह चुकी हैं। खेल के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ाने वाले इन दोनों व्यक्तित्वों का साहित्यिक संकलनों से जुड़ना इन पुस्तकों के लिए विशेष उपलब्धि है।
डॉ. शिखा गोस्वामी ‘निहारिका’ ने इन दोनों खिलाड़ियों की सहभागिता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे अपने लिए गर्व और सौभाग्य का विषय बताया। उनके अनुसार, साहित्य और खेल दोनों ही प्रतिभा, अनुशासन, समर्पण और निरंतर परिश्रम के प्रतीक हैं। ऐसे प्रेरणादायी व्यक्तित्वों का पुस्तकों में शामिल होना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव है।
डॉ. शिखा गोस्वामी ‘निहारिका’ पिछले दस वर्षों से साहित्य जगत में सक्रिय हैं। वे कवयित्री, लेखिका, रिपोर्टर एवं समीक्षक के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। रायपुर में जन्मीं शिखा वर्तमान में चंद्रखुरी, जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़ में निवासरत हैं। वे साहित्य सृजन के साथ सामाजिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
उनकी पाँच एकल और चार साझा पुस्तकें पहले प्रकाशित हो चुकी थीं। ‘नवरंगिणी’ और ‘अंबे के आँगन में’ के प्रकाशन के साथ उनकी प्रकाशित एवं संपादित पुस्तकों की कुल संख्या 11 हो गई है। उनकी रचनाएँ 200 से अधिक साझा संकलनों तथा पाँच हजार से अधिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनका नाम तीन बार वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो चुका है। साहित्य एवं मंच संचालन के क्षेत्र में उन्हें 500 से अधिक सम्मान प्राप्त हुए हैं। इनमें इंटरनेशनल आइकॉन अवॉर्ड 2024 और वुमेन्स आइकॉन अवॉर्ड 2025 प्रमुख हैं। साहित्यिक उपलब्धियों के लिए काशी हिंदी विद्यापीठ, बनारस द्वारा उन्हें मानद विद्या वाचस्पति उपाधि से भी सम्मानित किया गया है।
डॉ. शिखा के लिए ये दोनों पुस्तकें केवल साहित्यिक संकलन नहीं, बल्कि अपनी आराध्य कुलदेवी माँ महामाया के चरणों में समर्पित श्रद्धा और भावनाओं की अभिव्यक्ति हैं। नवरात्रि में इनका प्रकाशन उनके लिए आध्यात्मिक संतुष्टि के साथ साहित्यिक उपलब्धि भी है। इन पुस्तकों के माध्यम से उन्होंने भक्ति साहित्य को प्रोत्साहित करने और विभिन्न रचनाकारों की भावनाओं को पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।