उन्मुक्त उड़ान मंच का शारदीय नवरात्रि साहित्यिक महोत्सव भक्ति, साधना और सृजनशीलता के साथ संपन्न

उन्मुक्त उड़ान मंच का शारदीय नवरात्रि साहित्यिक महोत्सव भक्ति, साधना और सृजनशीलता के साथ संपन्न

 

शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर उन्मुक्त उड़ान मंच द्वारा 12 से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित छह दिवसीय साहित्यिक महोत्सव भक्ति, श्रद्धा, छंद-साधना और रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रेरणादायी उत्सव बनकर संपन्न हुआ। इस आयोजन में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की वंदना, आत्मशुद्धि, संकल्प, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों को साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया। देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े रचनाकारों ने आभासी माध्यम से ऑडियो-वीडियो प्रस्तुतियों तथा लिखित रचनाओं के माध्यम से उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

महोत्सव के अंतर्गत भक्ति-काव्य, छंदबद्ध रचनाओं, मुक्त काव्य और आलेखों के माध्यम से नवरात्रि के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व को रेखांकित किया गया। मंच की अध्यक्षा डॉ. दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ के मार्गदर्शन तथा आयोजन प्रभारियों के समर्पित प्रयासों से सभी कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुए।

12 से 13 अक्टूबर के आयोजन में “शारदीय नवरात्रि” विषय पर जलहरण घनाक्षरी (वार्णिक छंद) में रचनाएँ आमंत्रित की गईं। आयोजन प्रभारी रेखा पुरोहित ‘तरंगिणी’ ने विषय का प्रभावी निरूपण करते हुए कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। इस आयोजन में कुल 25 रचनाकारों की रचनाएँ प्राप्त हुईं, जिनमें से 17 रचनाकारों ने निर्धारित परिपाटी के अनुसार वीडियो के माध्यम से अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। प्रतिभागियों की छंदबद्ध अभिव्यक्तियों में माँ दुर्गा के प्रति श्रद्धा, शक्ति-उपासना और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति अनुराग स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

14 एवं 15 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय काव्य-कार्यक्रम में “मैया के नौ रूप” विषय पर छंद मुक्त काव्य रचनाएँ आमंत्रित की गईं। इस आयोजन में 41 रचनाएँ प्राप्त हुईं। आयोजन प्रभारी नीरजा शर्मा ‘अवनि’ के कुशल संचालन में रचनाकारों ने माँ शैलपुत्री से लेकर माँ सिद्धिदात्री तक नवदुर्गा के स्वरूपों, उनकी महिमा, करुणा, शक्ति और भक्तों पर उनकी कृपा का भावपूर्ण चित्रण किया। मुक्त काव्य की सहज अभिव्यक्ति ने भक्तिभाव को विविध संवेदनात्मक रंग प्रदान किए।

परंपरा, श्रद्धा और साहित्य का संगम 16 एवं 17 अक्टूबर को “नौ नवरात्र नौ भोग” विषय पर रचनाएँ आमंत्रित की गईं। इस आयोजन में नवदुर्गा के नौ स्वरूपों, उनसे जुड़ी मान्यताओं, पारंपरिक भोगों और पूजा-पद्धतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को साहित्यिक अभिव्यक्ति मिली। आयोजन प्रभारी, किरण भाटिया “नलिनी” के संचालन में 25 रचनाकारों ने भक्ति, समर्पण, लोक-आस्था और माँ के प्रति अटूट विश्वास को अपनी रचनाओं में स्थान दिया।

इन आयोजनों में अशोक दोशी ‘दिवाकर’, संजीव कुमार भटनागर ‘सजग’, डॉ. स्वर्णलता सोन ‘कोकिला’, लीला तिवानी, रंजना बिनानी ‘काव्या’, दलजीत ग्रेवाल, नीतू रवि गर्ग ‘कमलिनी’, मीनाक्षी चावला ‘मीनू’, रेखा पुरोहित ‘तरंगिणी’, अनु तोमर ‘अग्रजा’, अंजू श्रीवास्तव ‘अंजनी’, डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा’, सविता शर्मा, माधुरी श्रीवास्तव ‘यामिनी’, अनु भाटिया ‘हंसिनी’, सविता मेहरोत्रा ‘सुगंधा’, रेखा रावत ‘रागिनी’, डॉ. फूलचंद्र विश्वकर्मा ‘भास्कर’, विनीता नरूला ‘प्रसन्ना’, ज्योतिर्विद पं. कुलकांत मिश्र, संगीता चमोली ‘इंदूजा’, डॉ. पूनम सिंह ‘सारंगी’, अरुण ठाकर ‘कवित्त’, डॉ. शिमला पाण्डेय, कुसुमलता ‘तरुषि’, डॉ. दवीना अमर ठकराल ‘देविका’, सुरेश चंद्र जोशी ‘सहयोगी’, विशेष शर्मा ‘सुहासिनी’, अनिल जैन, नृपेन्द्र कुमार चतुर्वेदी, संध्या शर्मा, मंजुला सिन्हा ‘मेघा’, उषा करवा, संगीता वर्मा, प्रेम सिंह ‘काव्या’, बबीता भाटिया, निशा कौल शर्मा ‘चंद्रिका’, अंजनी कुमार चतुर्वेदी, गीतू शर्मा, डॉ. संजय यादव, सुमन वर्मा, उदय सिंह कुशवाहा, सुरेन्द्र बिन्दल ‘कलमकार’, पाल जी भाई राठोर, परमा दत्त झा, डॉ. एन.एल. शर्मा ‘निर्भय’, डॉ. अर्चना तिवारी ‘स्मृति’, हंसा श्रीवास्तव ‘हंसा’, नीरू बंसल, महेंद्र प्रताप सिंह, सुरेश सरदाना, गुरबीर सिंह ढींगरा तथा जयसिंह रावत सहित अनेक रचनाकारों ने सहभागिता निभाई। इनकी रचनात्मक सक्रियता ने आयोजन को व्यापकता और विविधता प्रदान की।

नवरात्रि के दौरान 12 से 17 अक्टूबर तक “नौ दिन, नौ संकल्प: स्वयं को बेहतर बनाने की साधना” विषय पर आलेख आमंत्रित किए गए। आयोजन प्रभारी विशेष शर्मा ‘सुहासिनी’ के संयोजन में इस विषय पर 25 आलेख प्राप्त हुए। आलेखों में आत्मानुशासन, सकारात्मक चिंतन, व्यवहार में सुधार, संवेदनशीलता, सेवा, संयम और जीवन में श्रेष्ठ मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी गई। इस पहल ने नवरात्रि को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखते हुए आत्मविकास और व्यक्तित्व-निर्माण की साधना के रूप में प्रस्तुत किया।

आयोजन की सफलता में मंच के पदाधिकारियों, आयोजन प्रभारियों और सहयोगी रचनाकारों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही। कृष्णकांत मिश्रा ‘कमल’ एवं संजीव कुमार भटनागर ‘सजग’ का सहयोग उल्लेखनीय रहा। सुरेश चंद्र जोशी ‘सहयोगी’ तथा अशोक दोशी ‘दिवाकर’ ने काव्यात्मक समीक्षाओं के माध्यम से रचनाओं के भाव-पक्ष, भाषा और अभिव्यक्ति पर उपयोगी सुझाव दिए। अन्य रचनाकारों ने भी परस्पर रचनात्मक सुधार और साहित्यिक संवाद में योगदान दिया।

मंच की अध्यक्षा डॉ. दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ के दैनिक समीक्षात्मक उद्बोधनों ने प्रतिभागियों को निरंतर प्रेरणा, मार्गदर्शन और अपनी लेखन-कला को निखारने का अवसर प्रदान किया। उनके मार्गदर्शन ने आयोजन को केवल प्रस्तुतियों का मंच न बनाकर सीखने, संवाद करने और साहित्यिक गुणवत्ता बढ़ाने का सार्थक माध्यम बनाया।

आयोजन के प्रचार-प्रसार एवं प्रस्तुतियों को प्रभावशाली बनाने के लिए तैयार किए गए आकर्षक पोस्टरों, सम्मान-पत्रों, कोलाज और वीडियो ने कार्यक्रम की गरिमा में वृद्धि की। विशेष रूप से नीरजा शर्मा ‘अवनि’ एवं नीतू रवि गर्ग ‘कमलिनी’ द्वारा तैयार किए गए कोलाज और वीडियो अत्यंत सराहनीय रहे। इन रचनात्मक प्रयासों ने आभासी आयोजन को अधिक आकर्षक, सुव्यवस्थित और स्मरणीय बनाया।

उन्मुक्त उड़ान मंच का यह शारदीय नवरात्रि साहित्यिक महोत्सव भक्ति, साहित्यिक अनुशासन, सृजनशीलता और सामूहिक सहभागिता का सुंदर उदाहरण बना। छंदबद्ध काव्य से लेकर मुक्त काव्य और विचारप्रधान आलेखों तक, प्रत्येक विधा ने नवरात्रि के आध्यात्मिक संदेश को अलग-अलग दृष्टिकोणों से अभिव्यक्त किया।

मंच की निरंतर प्रगति, रचनाकारों की बढ़ती सहभागिता और परस्पर सहयोग की भावना इस आयोजन की सफलता के प्रमुख आधार रहे। सभी पदाधिकारियों, आयोजन प्रभारियों, तकनीकी एवं रचनात्मक सहयोगियों तथा प्रतिभागी रचनाकारों के समर्पित प्रयासों से यह महोत्सव प्रेरणादायी, सार्थक और अविस्मरणीय बन गया।

उन्मुक्त उड़ान मंच की यह पहल साहित्य के माध्यम से आस्था, आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवन-मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।