महंत भरत दास महाराज ने वैदिक मंत्रों के साथ की आचार्य श्री चंद्र भगवान की पूजा-अर्चना
वैदिक सनातन परंपरा और सिद्धांतों की रक्षा का लिया गया संकल्प
महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या उदासीन आश्रम के महंत भरत दास महाराज ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि आज उदासीन संप्रदाय के 165वें आचार्य जगद्गुरु श्री चंद्र भगवान का 532वां जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर महाराज ने कहा कि भगवान जगद्गुरु श्री चंद्र भगवान का अवतरण ‘भक्ति काल’ में हुआ था। उस काल की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उस समय ज्ञान को मानने वाले ज्ञान को श्रेष्ठ मानते थे और भक्ति को मानने वाले भक्ति को श्रेष्ठ मानते थे, जिससे समाज में परस्पर मतभेद की स्थिति थी। ऐसे समय में भगवान श्री चंद्र भगवान ने वैदिक सनातन परंपरा और सिद्धांतों की स्थापना की। वैदिक मंत्रों के साथ हुआ अर्चन और वंदन जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर उदासीन आश्रम में विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया गया। महंत भरत दास महाराज ने संप्रदाय के नियमों, सिद्धांतों और विधियों के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आचार्य जगद्गुरु श्री चंद्र भगवान के चरणों में अर्चन, वंदन और पूजन किया। संतों और भक्तों से आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना
महंत भरत दास महाराज ने भगवान श्री चंद्र जी से प्रार्थना की कि वे जिस प्रकार सनातन परंपरा की रक्षा करते आए हैं, उसी प्रकार उदासीन संतृषिया आश्रम और उदासीन संप्रदाय से जुड़े सभी दीक्षित संतों और भक्तजनों पर हमेशा अपना आशीर्वाद बनाए रखें। कार्यक्रम में देश भर से आए कई संत-महापुरुषों और श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया और भगवान श्री चंद्र जी के चरणों में अपनी श्रद्धांजलि व श्रद्धा अर्पित की।