महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। छतरपुर, मध्यप्रदेश। मिथिला धाम की पावन धरती पर आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर एक युवा संत ने विरक्ति परंपरा से जुड़कर अपने जीवन को ठाकुर जी की सेवा के लिए समर्पित किया है। छतरपुर, मध्यप्रदेश निवासी 26 वर्षीय रामचंद्र दास, उर्फ शिवम पांडेय ने विरक्ति परंपरा को स्वीकार किया। रामचंद्र दास ने वर्ष 2009 में महंत श्याम सुंदर दास जी से दीक्षा ग्रहण की थी। दीक्षा के बाद से ही वे आध्यात्मिक साधना और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ते रहे। अब 29 जुलाई 2026 को उन्होंने अपने गुरु महंत श्याम सुंदर दास जी से विरक्ति ग्रहण कर ठाकुर जी की सेवा को अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाया।
विरक्ति परंपरा से जुड़ने के बाद रामचंद्र दास प्रसन्न और आह्लादित नजर आए। उन्होंने इस अवसर को अपने आध्यात्मिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए ठाकुर जी की सेवा और साधना के प्रति समर्पण व्यक्त किया।मिथिला धाम में विरक्ति परंपरा से जुड़ने का यह अवसर उनके लिए आध्यात्मिक यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। गुरु के मार्गदर्शन में अब रामचंद्र दास ठाकुर जी की सेवा, साधना और भक्ति के पथ पर आगे बढ़ने के लिए संकल्पित हैं।
गुरु-दीक्षा से विरक्ति तक की यह यात्रा युवा रामचंद्र दास के आध्यात्मिक जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में सामने आई है।