विद्या मंदिर में गूंजा श्रीकृष्ण का संदेश, श्रद्धा एवं उल्लास से मनाई गई जन्माष्टमी
श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों से विद्यार्थियों ने सीखी धैर्य, साहस, सच्ची मित्रता और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा
लवकुश सिंह संवाददाता
अनुराग लक्ष्य न्यूज बस्ती
बस्ती। सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रामबाग-बस्ती में वंदना सभा के दौरान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री गोविंद सिंह जी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के बालरूप चित्र पर पुष्प अर्पित एवं पूजन कर किया गया।
विद्यालय के आचार्य श्री अंकित कुमार गुप्ता जी ने श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग से लेकर उनके बालरूप एवं गोकुल की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उनके जीवन के विभिन्न प्रसंगों को विद्यार्थियों के सामने रखा। उन्होंने श्रीकृष्ण-सुदामा की सच्ची मित्रता, महाभारत में अर्जुन के सारथी के रूप में श्रीकृष्ण की भूमिका तथा कुरुक्षेत्र में उनके द्वारा दिए गए श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें कठिनाइयों में धैर्य, विपरीत परिस्थितियों में साहस, सच्ची मित्रता, माता-पिता एवं गुरु का सम्मान, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और निरंतर परिश्रम की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
संगीत टोली के विद्यार्थियों ने भजन प्रस्तुत कर वंदना सभा के वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य श्री गोविंद सिंह जी ने विद्यार्थियों को श्रीकृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश देते हुए कहा कि सामान्यतः प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में जन्म के बाद संकट आते हैं, लेकिन श्रीकृष्ण ऐसे हैं जिनके जीवन में जन्म लेने से पहले ही अनेक संकट और कष्ट आ गए थे। उन्होंने इन सभी कठिनाइयों का सामना करते हुए अपने जीवन को लोककल्याण के लिए समर्पित किया और आज योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के रूप में पूजे जाते हैं।
उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक घर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़े उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं उनके आदर्शों को समझकर उन्हें अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर उपप्रधानाचार्य श्री विजय नारायण उपाध्याय जी सहित विद्यालय के समस्त आचार्य, कर्मचारी एवं छात्र भैया उपस्थित रहे।