समाज में नकारात्मकता के बीच ‘सकारात्मक सोच’ अपनाना एक तपस्या समान: लेखिका श्री ठाकुर

 

समाज में नकारात्मकता के बीच ‘सकारात्मक सोच’ अपनाना एक तपस्या समान: लेखिका श्री ठाकुर

देवघर (झारखंड): वर्तमान दौर में जहाँ समाज में नकारात्मक विचारों और शिकायतों की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, वहीं सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना किसी तपस्या से कम नहीं है। देवघर की प्रसिद्ध लेखिका एवं कवयित्री श्री ठाकुर ने सकारात्मक जीवन शैली और उसके मार्ग में आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं।

नकारात्मक सोच: व्यावहारिक जीवन का सबसे बड़ा बाधक

लेखिका श्री ठाकुर के अनुसार, समाज में नकारात्मक प्रवृत्ति वाले लोगों की कोई कमी नहीं है। ऐसे लोग हर परिस्थिति में शिकायतें ढूंढते हैं और पूर्वग्रह से ग्रसित रहते हैं कि जीवन में कुछ भी बेहतर होना संभव नहीं है।

“नकारात्मक मानसिकता वाले व्यक्ति के लिए ‘सकारात्मकता’ केवल किताबी ज्ञान या एक ढकोसला मात्र होती है। वे मानते हैं कि व्यावहारिक जीवन में सकारात्मक रहना संभव ही नहीं है, जिसके कारण वे किसी भी प्रयास को व्यर्थ समझकर हार मान लेते हैं।” — श्री ठाकुर (लेखिका एवं कवयित्री)

नकारात्मक संगत से ऊर्जा का ह्रास

अपने वक्तव्य में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी नकारात्मक सोच वाले व्यक्तियों की संगति मनुष्य के सम्पूर्ण प्रयासों और उसकी आंतरिक शक्ति को क्षीण (कमज़ोर) कर देती है। जब भी कोई व्यक्ति प्रगति या सकारात्मकता की ओर कदम बढ़ाता है, तो ऐसे लोग उसके प्रयासों को पीछे धकेलने का काम करते हैं।

दूरी बनाना ही एकमात्र समाधान

लेखिका ने बताया कि ऐसे व्यक्ति आपके परिवार, मित्र मंडली या समाज में कहीं भी मौजूद हो सकते हैं।

  • पहचान आवश्यक: सही समय पर ऐसे लोगों के व्यवहार और मानसिकता को पहचानना बहुत ज़रूरी है।
  • दूरी बनाएं: अपने लक्ष्यों और मानसिक शांति की सुरक्षा के लिए ऐसे व्यक्तियों से दूरी बनाना अनिवार्य है।
  • सकारात्मक सुगंध फैलाएं: जब आप नकारात्मक प्रभावों से दूर रहेंगे, तभी आपकी सकारात्मकता की सुगंध समाज में सही अर्थों में फैल सकेगी।