मानसून में डेंगू से बचाव के लिए सप्ताह में 10 मिनट का निरीक्षण जरूरी: केजीएमयू

लखनऊ,  किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के तहत “मानसून सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी – संचारी रोगों से बचाव हमारी प्राथमिकता” विषय पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य मानसून के दौरान फैलने वाले संक्रामक रोगों की रोकथाम, समय पर पहचान और बचाव के उपायों के प्रति आमजन को जागरूक करना था।कार्यक्रम का शुभारंभ माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. विमला वेंकटेश ने किया। उन्होंने कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम में सामुदायिक सहभागिता सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने बताया कि डेंगू फैलाने वाला एडीज़ मच्छर गंदे नहीं, बल्कि स्वच्छ रुके हुए पानी में पनपता है, इसलिए लोगों को इस भ्रांति से बाहर आने की आवश्यकता है।
उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक सप्ताह घर और आसपास कूलर, गमले, बाल्टियां, ओवरहेड टैंक, पुराने टायर तथा अन्य जलभराव वाले स्थानों की जांच कर जमा पानी को अवश्य हटाएं। उनका कहना था कि सप्ताह में केवल 10 मिनट का निरीक्षण मच्छरों के प्रजनन को रोकने और पूरे परिवार को डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।कार्यक्रम के दौरान एमडी रेजिडेंट डॉक्टरों ने संचारी रोगों की रोकथाम पर पोस्टर प्रस्तुत किए। इसके साथ ही हाथों की सही सफाई, ओआरएस घोल तैयार करने की विधि, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने और मच्छररोधी उपायों के सही उपयोग का लाइव प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों के लिए इंटरएक्टिव क्विज, ‘मिथक बनाम तथ्य’ सत्र और विशेषज्ञ परिचर्चा का भी आयोजन किया गया, जिसमें संचारी रोगों से जुड़ी भ्रांतियों का वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर निराकरण किया गया।विशेषज्ञों ने मानसून के दौरान होने वाले डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, लेप्टोस्पायरोसिस और अन्य वायरल संक्रमणों की समय पर पहचान, शीघ्र चिकित्सकीय परामर्श, एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग तथा एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। परिवार और समुदाय स्तर पर अपनाए जाने वाले सरल बचाव उपायों पर भी विशेष जोर दिया गया।समापन सत्र में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. शीतल वर्मा ने कहा कि मानसून में बुखार के शुरुआती 24 घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि लगातार बुखार आने पर स्वयं दवा लेने से बचें और तुरंत चिकित्सकीय जांच कराएं। उन्होंने पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने, अनावश्यक एंटीबायोटिक के प्रयोग से बचने तथा समय पर जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि समय पर जांच से विभिन्न संक्रमणों की सही पहचान संभव होती है, जिससे मरीज को समय पर उचित उपचार मिल सकता है और गंभीर जटिलताओं से बचाव होता है।कार्यक्रम में प्रो. आर.के. कल्याण, प्रो. प्रशांत गुप्ता, डॉ. पारुल जैन, डॉ. सुरुचि शुक्ला, डॉ. वसुधा केसरवानी, डॉ. सर्वोदय त्रिपाठी सहित विभाग के संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, छात्र-छात्राएं, वैज्ञानिक, शोधार्थी और कर्मचारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने आमजन से मानसून के दौरान घर और आसपास पानी जमा न होने देने, हाथों की स्वच्छता बनाए रखने, सुरक्षित भोजन और स्वच्छ पेयजल का उपयोग करने, स्वयं दवा लेने से बचने तथा बुखार या अन्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की। विभाग ने कहा कि जनसहभागिता और जागरूकता के माध्यम से ही संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है और एक स्वस्थ एवं सुरक्षित समाज का निर्माण किया जा सकता है।