बरसात में थोड़ी-सी सावधानी से मौसमी बीमारियों से बचाव संभव : प्रो. डॉ. नवीन सिंह

बरसात में थोड़ी-सी सावधानी से मौसमी बीमारियों से बचाव संभव : प्रो. डॉ. नवीन सिंह

अनुराग लक्ष्य न्यूज

बस्ती। आस्था आयुर्वेदिक एक्यूप्रेशर हॉलिस्टिक ट्रीटमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर, कटेश्वर पार्क के निदेशक प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि बरसात का मौसम जहां हरियाली, शीतलता और प्राकृतिक सौंदर्य लेकर आता है, वहीं यह अनेक संक्रामक रोगों के फैलने का भी अनुकूल समय होता है। वातावरण में बढ़ी नमी, दूषित जल, मच्छरों का प्रकोप तथा पाचन शक्ति में कमी के कारण वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, दस्त एवं त्वचा संबंधी संक्रमण तेजी से बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि थोड़ी-सी जागरूकता और सावधानी अपनाकर इन बीमारियों से प्रभावी बचाव किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि बरसात के दिनों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हमेशा ताजा, गर्म एवं घर का बना भोजन करें तथा खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, कटे हुए फल और बासी भोजन से परहेज करें। पीने के लिए केवल स्वच्छ या उबला हुआ पानी ही प्रयोग करें। भोजन से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत संक्रमण से बचाव का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है।

प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि इस मौसम में पाचन शक्ति अपेक्षाकृत कमजोर हो जाती है, इसलिए हल्का, सुपाच्य एवं पौष्टिक भोजन लेना चाहिए। भोजन में हरी सब्जियां, दालें, अंकुरित अनाज, मौसमी फल तथा अदरक, हल्दी, लहसुन और तुलसी जैसे प्राकृतिक तत्वों को शामिल करें। तली-भुनी एवं अत्यधिक मसालेदार चीजों का सेवन सीमित रखें तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर शरीर में जल संतुलन बनाए रखें।

उन्होंने कहा कि बरसात में मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है। इसलिए घर और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, गमलों और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें। पूरी बांह के कपड़े पहनें तथा आवश्यकता अनुसार मच्छरदानी या मच्छररोधी साधनों का उपयोग करें। इससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है।

प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम तथा पर्याप्त नींद अत्यंत आवश्यक है। साथ ही मानसिक तनाव से दूर रहकर सकारात्मक सोच बनाए रखना भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

उन्होंने कहा कि एक्यूप्रेशर पद्धति के अनुसार पैरों में शरीर के विभिन्न अंगों से संबंधित स्वास्थ्य बिंदु होते हैं। प्रतिदिन सुबह-शाम कुछ मिनट इन बिंदुओं पर हल्का दबाव देने से शरीर की ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने, रक्त संचार में सुधार तथा प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करने में सहायता मिलती है। हालांकि तेज बुखार, लगातार उल्टी-दस्त, सांस लेने में तकलीफ या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर बिना विलंब योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बरसात का मौसम आनंद का मौसम है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। यदि स्वच्छता, संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, व्यायाम और समय पर उपचार की आदत अपनाई जाए तो अधिकांश मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि रोग होने के बाद उपचार से बेहतर है रोग होने से पहले बचाव, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए।