मानसून सत्र में जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो, हंगामे से बचे संसद: मायावती

लखनऊ, । बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने संसद के मानसून सत्र के एक दिन पहले केंद्र और विपक्षी दलों से जनहित के मुद्दों पर गंभीर एवं सार्थक चर्चा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संसद का सत्र हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ने के बजाय महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे ज्वलंत मुद्दों के समाधान पर केंद्रित होना चाहिए।मायावती ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी, हेराफेरी और गबन के मामले को लेकर व्यापक जनाक्रोश है। उनके अनुसार इस मुद्दे की गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक है और संसद में भी इस पर चर्चा होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जनता धर्म के राजनीतिकरण करने वालों से जवाबदेही मांग रही है।बसपा प्रमुख ने कहा कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद की स्थिति, राजस्थान में सरकारी लापरवाही के कारण गर्भवती महिलाओं की मौत, विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा, चुनावी घोषणाओं में कथित अनियमितताएं, सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ों की बढ़ती घटनाएं तथा वर्षों से बसे लोगों की बस्तियों के ध्वस्तीकरण जैसे मुद्दों ने संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था को प्रभावित किया है।उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव, भारतीय रुपये का अवमूल्यन तथा इनका देश की अर्थव्यवस्था और आमजन के जीवन पर पड़ने वाला प्रभाव भी गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सत्ता और विपक्ष से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में साझा समाधान खोजने की अपील की।मायावती ने कहा कि लगभग 140 करोड़ आबादी वाले देश में बहुजन समाज सहित आम जनता का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए संसद का प्रभावी ढंग से चलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र बिना किसी उत्तेजना, रोष या विद्वेष के स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप संचालित होना चाहिए।उन्होंने सभी संवैधानिक संस्थाओं से भी आग्रह किया कि वे ऐसे प्रयास करें जिससे देश के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हालात से जूझ रहे लोगों की परेशानियां और न बढ़ें। मायावती ने कहा कि संसद को इन राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर और संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए तथा इसकी शुरुआत वर्तमान मानसून सत्र से ही होनी चाहिए। जनहित और सुशासन के लिए संसद का प्रभावी होना अत्यंत आवश्यक है।