01 जुलाई साहित्य के सच्चे साधक यमराज मित्र डॉ.सुधीर श्रीवास्तव भैया को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ
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कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका परिचय उनके नाम से नहीं, बल्कि उनके कर्म, व्यवहार और संस्कार से होता है। आ. सुधीर श्रीवास्तव भैया ऐसे ही विलक्षण व्यक्तित्व के धनी हैं। उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद से जुड़े सुधीर भैया आज साहित्य जगत का एक ऐसा नाम हैं, जिनसे शायद ही कोई साहित्यिक मंच अपरिचित हो। देश के लगभग हर राज्य में साहित्यकार उन्हें जानते, सम्मान देते और स्नेह करते हैं।
उनके चेहरे पर सदा खिली रहने वाली मुस्कान, विनम्र स्वभाव, सरलता, अपनापन और संस्कार उन्हें सबसे अलग पहचान देते हैं। उनके सानिध्य में छोटा हो या बड़ा, हर व्यक्ति सम्मान, आत्मीयता और आत्मविश्वास का अनुभव करता है। वे स्वयं आगे बढ़ने के साथ-साथ दूसरों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
साहित्य के क्षेत्र में उन्होंने अपनी लेखनी से एक अनूठी पहचान बनाई है। आज उन्हें प्रेमपूर्वक “यमराज मित्र” के नाम से जाना जाता है। यमराज को केंद्र में रखकर उन्होंने जितनी हास्य-व्यंग्य रचनाएँ लिखी हैं, उनकी संख्या गिनना भी कठिन है। उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है।
उनके व्यक्तित्व की सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि उन्होंने मृत्यु के उपरांत अपने अंगदान का संकल्प लिया है। यह निर्णय केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि मानवता के प्रति उनकी संवेदनशील सोच का प्रमाण है। ऐसे महान व्यक्तित्व वास्तव में समाज के लिए प्रेरणा हैं।
मैं स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मानती हूँ कि मुझे उनका स्नेह, मार्गदर्शन और संरक्षण मिला। उनके साथ कार्य करते हुए बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। उनकी डाँट में भी अपनापन होता है और उनके आशीर्वाद में आगे बढ़ने की प्रेरणा।
साहित्य जगत में कार्य करते समय अनेक बार ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं, जब विशेषकर हम बेटियों को निराशा और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। ऐसे हर कठिन समय में सुधीर भैया एक मजबूत ढाल बनकर हमारे साथ खड़े रहते हैं। उनका एक वाक्य आज भी मन में साहस भर देता है— “मैं हूँ ना, क्यों डरती हो? जो भी कुछ कहे, मुझे बताना। तेरा सुधीर भैया अभी ज़िंदा है।” यह केवल शब्द नहीं, बल्कि एक भाई का अपनी बहन के प्रति अटूट विश्वास, सुरक्षा और स्नेह है।
ऐसे स्नेहमयी, प्रेरणादायी, संवेदनशील और महान व्यक्तित्व के धनी मेरे प्रिय बड़े भाई को जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएँ।
ईश्वर से मेरी यही प्रार्थना है कि आपका स्नेह, आपका आशीर्वाद और आपका मार्गदर्शन हम सभी पर सदैव बना रहे। आप स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों, निरंतर साहित्य की सेवा करते रहें और आपकी लेखनी सदैव समाज को नई दिशा देती रहे।
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ, भैया! आपका प्यार यूँ ही हमेशा बना रहे। हम सबको आप जैसे बड़े भाई पर गर्व है।
आपकी छोटी बहन शिखा गोस्वामी “निहारिका” मुंगेली, छत्तीसगढ़