नीला ड्रम 

नीला ड्रम

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अब तो रिश्ते ढोए जा रहे हैं,

कोरे भ्रम में,

इसलिए लाशें मिल रहीं है ,

नीले ड्रम में।

रूहानी रिश्ते दिवालिया हो गए हैं।

जिस्मानी रिश्ते सवालिया हो गए हैं।

ऐसी घटनाएँ घट रही है,

रोज क्रम ही क्रम में।

इसलिए लाशें मिल रही हैं ,

नीले ड्रम में।

मानवता हो रही नित्य शून्य है,

मनु का क्षीण हो रहा पुण्य है,

सोरायसिस पकड़ गया है,

मानसिक चर्म में,

इसलिए लाशे मिल रही है,

नीले ड्रम में।

कर्तव्य पर भारी पड़ा अधिकार है,

इंसानियत हो रही शर्मसार है,

दीमक लग रहा है

सुधर्म और सुकर्म में,

इसलिए लाशे मिल रही है,

नीले ड्रम में।

उग्रता नग्नता की लत

जोड़ पकड़ रही है,

गलत को सही साबित करने की,

होड़ जकड़ रही है,

कैसे कैसे रंग दिखला रही है,

जिंदगी अपने हरम में,

इसलिए लाशे मिल रही है,

नीले ड्रम में।

 

डॉ अणिमा श्रीवास्तव

केंद्रीय विद्यालय, आरा

पटना, बिहार