परीक्षित उद्धार व सुदामा चरित्र के साथ सात दिवसीय कथा का विधिवत समापन
आचार्य डॉ. महेश दास ने श्रद्धालुओं को दिया विशेष संदेश, ग्रामीणों ने लिया कथा का रसपान
स्थानीय क्षेत्र में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन परीक्षित उद्धार एवं सुदामा चरित्र के भावपूर्ण वर्णन के साथ विधिवत यज्ञ-हवन और पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ। कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा पांडाल भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा।
कथावाचक आचार्य डॉ. महेश दास ने अंतिम दिवस पर राजा परीक्षित के उद्धार प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण मात्र से मनुष्य के जीवन के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भक्ति, सत्संग और सत्कर्म ही मानव जीवन को सार्थक बनाते हैं।
इसके पश्चात सुदामा चरित्र का भावपूर्ण चित्रण करते हुए उन्होंने सच्ची मित्रता, समर्पण और भगवान के प्रति निष्कपट प्रेम का संदेश दिया। कथा के दौरान कई श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
मुख्य यजमान के रूप में हनुमान दुबे एवं सुमित्रा देवी ने विधि-विधान से यज्ञ-हवन में आहुति दी। पूर्णाहुति के साथ सात दिवसीय आयोजन का विधिवत समापन हुआ। कार्यक्रम के उपरांत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रसाद ग्रहण किया।
सात दिनों तक चले इस आध्यात्मिक आयोजन में आसपास के गांवों से भी श्रद्धालुओं ने पहुंचकर कथा का रसपान किया। आयोजन समिति के सदस्यों ने सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
समापन अवसर पर आचार्य डॉ. महेश दास ने अपने विशेष संदेश में कहा कि “जीवन में सदैव धर्म, सत्य और सेवा का मार्ग अपनाएं, यही सच्ची श्रद्धा है।” पूरे क्षेत्र में इस धार्मिक आयोजन की सराहना की जा रही है।