“जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” – पसमांदा समाज की राजनीतिक भागीदारी पर जोर
2027 चुनाव से पहले सपा नेतृत्व से हिस्सेदारी की मांग
जितेन्द्र पाठक
संतकबीरनगर जिले के एक निजी होटल में सपा नेता इसाक अंसारी के नेतृत्व में मुस्लिम पिछड़ा पसमांदा समाज द्वारा जागरूकता एवं संवैधानिक अधिकार संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पसमांदा समाज के लोगों ने भाग लिया और राजनीतिक भागीदारी को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि पसमांदा समाज लंबे समय से सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक स्तर पर उपेक्षा का सामना करता रहा है। अब समय आ गया है कि “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” के सिद्धांत को व्यवहार में लागू किया जाए। कार्यक्रम के दौरान समाज के अधिकारों, आरक्षण, शिक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए इसाक अंसारी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मांग की कि पसमांदा मुसलमानों को उनकी जनसंख्या और पार्टी से जुड़ाव के अनुपात में राजनीतिक हिस्सेदारी दी जाए। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पसमांदा समाज के लोग पार्टी से जुड़े हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 के चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में पार्टी नेतृत्व को पसमांदा समाज की ताकत और योगदान को ध्यान में रखते हुए टिकट वितरण और संगठनात्मक पदों में उचित भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में समाज के लोगों ने एकजुटता का संदेश देते हुए राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।