नई गजल -त्रिशिका धरा

साहिब! हम ऋणी तुम्हारे, तुमने राम का मंदिर बना दिया।

भगवा-ए-हिन्द किया तुमने, तो हमने कमल खिला दिया।

हम पहले ही घायल थे, आरक्षण की तलवार से।

अब “सवर्ण” को कासा देके उसी, मंदिर के बाहर बिठा दिया।

 

— त्रिशिका धरा

ओज कवयित्री एवं लेखिका

कानपुर, उत्तर प्रदेश