लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा निजी सहभागिता के अंतर्गत स्थापित सात पुरस्कार संस्थानों के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित अलंकरण समारोह में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और चयनित विद्वानों को पुरस्कार प्रदान किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के उपाध्यक्ष प्रोफेसर अभय कुमार जैन ने की। उन्होंने मंत्री का स्वागत एवं सम्मान करते हुए संस्थान की वैचारिक यात्रा और सामाजिक दायित्वों पर प्रकाश डाला।समारोह में संस्थान के निदेशक अमित कुमार अग्निहोत्री ने विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया और संस्थान की शैक्षणिक, शोध एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान जैन दर्शन, अहिंसा, अनेकांत और नैतिक मूल्यों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि जीवन जीने की सच्ची कला महावीर के सर्वोदय सिद्धांतों को आत्मसात करने से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की प्राचीन धरोहर और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने के लिए संस्कृति विभाग निरंतर प्रयासरत है। जैन धर्म से जुड़े सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कार्य किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस समृद्ध विरासत से परिचित हो सकें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर अभय कुमार जैन ने कहा कि संस्थान निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है और अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सतत प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा प्रदेश के 18 तीर्थंकरों के जन्म स्थलों पर संगोष्ठियों का आयोजन कर अहिंसा और अनेकांत के सिद्धांतों के माध्यम से विश्व शांति का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही शाकाहार और सदाचार के प्रचार-प्रसार, नैतिक शिक्षा एवं संस्कार शिविरों के माध्यम से प्रदेश भर के युवाओं में नैतिक मूल्यों की अभिवृद्धि की दिशा में सार्थक कार्य किया जा रहा है।उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 2024 से गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रदेश के श्रेष्ठ विद्वान को सम्मानित करने की परंपरा प्रारंभ की गई है। इसी क्रम में वर्ष 2025 से सात पुरस्कारों की स्थापना कर प्रतिवर्ष सात विद्वानों को सम्मानित करने का अभिनव कार्य शुरू किया गया है। संस्थान द्वारा जैन अध्ययन से संबंधित स्नातक पाठ्यक्रम भी तैयार किया गया है, जिसकी कक्षाएं शीघ्र प्रारंभ करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। समारोह में विद्वानों, शोधकर्ताओं और संस्कृति प्रेमियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।