बहराइच में परिवार नियोजन काउंसलिंग कॉर्नर का लक्ष्य पूरा

बहराइच में परिवार नियोजन काउंसलिंग कॉर्नर का लक्ष्य पूरा

सीएचसी रिसिया में अंतिम एफपीसीसी का हुआ उद्घाटन,

जिले में अब सक्रिय केन्द्रों की संख्या हुई 20

 

बहराइच 04 फरवरी 2026रू जिले में परिवार नियोजन सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया है। सोमवार को नॉन-उम्मीद ब्लॉक स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रिसिया में परिवार नियोजन काउंसलिंग कॉर्नर (एफपीसीसी) का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही जनपद में निर्धारित 20 एफपीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य पूरा हो गया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय शर्मा ने सीएचसी रिसिया में एफपीसीसी का शुभारंभ करते हुए कहा कि परिवार नियोजन केवल जनसंख्या नियंत्रण नहीं, बल्कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य, सुरक्षित गर्भधारण और स्वस्थ परिवार की नींव है। एफपीसीसी के माध्यम से योग्य दंपतियों को गर्भनिरोधक विकल्पों, प्रजनन स्वास्थ्य और सुरक्षित मातृत्व से जुड़ी सही जानकारी एक ही स्थान पर मिलेगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग भ्रांतियों और झिझक के कारण परिवार नियोजन सेवाओं से दूर रहते हैं। प्रशिक्षित काउंसलरों की मदद से अब दंपतियों को उनके नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही परामर्श मिलेगा, जिससे वे सोच-समझकर निर्णय ले सकेंगे।

सीएचसी रिसिया में आयोजित कार्यक्रम में 52 आशा कार्यकर्ता, 15 एएनएम, 5 मेडिकल ऑफिसर, आईसीटीसी काउंसलर, लेबर रूम स्टाफ नर्स सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे। सीएमओ ने काउंसलरों को निर्देश दिया कि वे प्रभावी काउंसलिंग करें और परिवार नियोजन सेवाओं की स्वीकार्यता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दें। पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि राम बरन यादव ने बताया कि जिले में स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन में पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया और मोबियस फाउंडेशन के वित्तीय सहयोग से उम्मीद परियोजना का संचालन किया जा रहा है, जिसके तहत उम्मीद ब्लॉकों में 15 और नॉन-उम्मीद ब्लॉकों में 5 एफपीसीसी स्थापित किए गए हैं। इस प्रकार जनपद बहराइच में कुल 20 परिवार नियोजन काउंसलिंग कॉर्नर सक्रिय हो चुके हैं, जिससे सेवाओं की पहुँच ब्लॉक से लेकर समुदाय स्तर तक मजबूत हुई है।

रिसिया सीएचसी अधीक्षक डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि एफपीसीसी स्थापित होने से 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग के योग्य दंपतियों को सुरक्षित गर्भनिरोधक विकल्प, व्यक्तिगत परामर्श और आवश्यक जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। इससे अनियोजित गर्भधारण में कमी आएगी और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार होगा।

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