शिक्षा, संस्कार और सफलता का संगम: श्रीराम पब्लिक स्कूल में सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रारंभ
– प्लेबे से इंटरमीडिएट तक सीमित सीटों पर प्रवेश शुरू, आधुनिक शिक्षा के साथ खेल, योग, विज्ञान और सांस्कृतिक गतिविधियों का समन्वित मॉडल
बस्ती।तेजी से बदलते शैक्षिक परिवेश में जहां शिक्षा को केवल अंकों और प्रतियोगिता तक सीमित किया जा रहा है, वहीं श्रीराम पब्लिक स्कूल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ छात्रों के सर्वांगीण विकास को अपना ध्येय बनाकर शिक्षा जगत में एक सशक्त पहचान स्थापित कर चुका है। विद्यालय में शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया विधिवत रूप से प्रारंभ हो चुकी है।
विद्यालय के प्रबंध निदेशक राजेश चौधरी ने बताया कि श्रीराम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि छात्रों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचान कर उसे सही दिशा देना है। विद्यालय का मानना है कि शिक्षा तभी सार्थक है जब वह बच्चे को संस्कारवान, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी नागरिक बनाए।
उन्होंने बताया कि विद्यालय में प्लेबे से लेकर इंटरमीडिएट तक सभी कक्षाओं में प्रवेश दिए जा रहे हैं। सीमित सीटों की व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि प्रत्येक छात्र पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिया जा सके और शिक्षा की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो।
विद्यालय में आधुनिक शिक्षण प्रणाली को अपनाते हुए पढ़ाई को रुचिकर, प्रयोगात्मक और व्यवहारिक बनाया गया है। स्मार्ट क्लास, विषय आधारित प्रायोगिक गतिविधियां, और नियमित मूल्यांकन के माध्यम से छात्रों की सीखने की क्षमता को निरंतर विकसित किया जाता है।
पाठ्यक्रम के साथ-साथ विद्यालय में खेलकूद, योग, ध्यान, संगीत, नृत्य, विज्ञान प्रदर्शनी, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, कंप्यूटर शिक्षा, भाषण एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता जैसी गतिविधियों को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है। विद्यालय की सुसज्जित कंप्यूटर लैब एवं विज्ञान प्रयोगशालाएं छात्रों को तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टि से सशक्त बनाती हैं, जबकि विशाल खेल मैदान उनके शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रबंध निदेशक ने कहा कि विद्यालय का शिक्षण स्टाफ अनुभवी, प्रशिक्षित एवं छात्रों के प्रति पूर्णतः समर्पित है। शिक्षक प्रत्येक छात्र की क्षमता, रुचि और कमजोरियों को समझते हुए उन्हें निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। कमजोर छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं एवं परामर्श की व्यवस्था भी की गई है।
विद्यालय में अनुशासन, नैतिक शिक्षा और सुरक्षित वातावरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। अभिभावकों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर बच्चों की प्रगति की जानकारी साझा की जाती है, जिससे स्कूल और परिवार मिलकर छात्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख सकें।
राजेश चौधरी ने अभिभावकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि हमारा विश्वास है कि जब शिक्षा में संस्कार, अनुशासन और नवाचार का समावेश होता है, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण होता है। उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और हम इस संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए समय रहते प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण कराएं। सीमित सीटों के कारण प्रवेश प्रथम आगत–प्रथम पात्रता के आधार पर दिए जाएंगे।