राम रस में डूबी धर्मनगरी: गोपाल दाधीच महाराज की ओजस्वी वाणी सुनने उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। रामलला की पावन नगरी अयोध्या इन दिनों भक्ति और आध्यात्म के अनूठे संगम की साक्षी बन रही है। महाराष्ट्र के नागपुर से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक गोपाल दाधीच महाराज के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही श्रीराम कथा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया है। स्थानीय वैदेही भवन में आयोजित इस भव्य श्रीराम कथा में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भक्त उमड़ रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गुंजायमान है।
सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए युवाओं को आगे आना होगा
कथा के दौरान महाराज जी ने रामायण और भागवत जैसे पवित्र ग्रंथों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी जड़ों को न भूलें। महाराज जी ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी से अपील की कि वे इन ग्रंथों का गहराई से अध्ययन करें। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “हमारी प्राचीन संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों की रक्षा केवल इन पवित्र ग्रंथों के माध्यम से ही संभव है। श्रीराम का जीवन: आदर्शों की पाठशाला प्रभु श्रीराम के चरित्र का वर्णन करते हुए गोपाल दाधीच महाराज ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम का जीवन हर वर्ग के लिए एक आदर्श है। उन्होंने बताया कि कैसे प्रभु ने एक पुत्र, पति, राजा और समाज के संरक्षक के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ किया। महाराज जी के अनुसार, कथा सुनने की सार्थकता तभी है जब हम उनके गुणों को अपने वास्तविक जीवन में उतारें। विभिन्न राज्यों से जुटे श्रद्धालु
इस आयोजन की खास बात यह है कि इसमें केवल स्थानीय भक्त ही नहीं, बल्कि नागपुर सहित देश के विभिन्न राज्यों और शहरों से आए श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं। ओजस्वी वाणी और भक्तिमय भजनों के बीच भक्तगण भक्ति के सागर में गोते लगा रहे हैं।
आयोजन में उमड़ा उत्साह
कार्यक्रम के संयोजक सतनारायण लोहिया ने बताया कि रामनगरी अयोध्या में गुरु जी के सानिध्य में इस कथा का आयोजन होना समस्त भक्तजनों के लिए परम सौभाग्य का विषय है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी सहयोगियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।