तुझे कौन सा फूल चढ़ाऊं माँ – ज्योती वर्णवाल 

विषय-सरस्वती वंदना

विद्या-कविता

 

तुझे कौन सा फूल चढ़ाऊं माँ?

यह तो बतला दे…

ज्ञान का ऐसा दीप जला दे,

अज्ञान का अंधकार मिटा दे।

वीणा की वह तान सुना दे,

सोए हुए भाग्य जगा दे,

कंठ में शारदे! सुर सजा दे,

मन के विकारों को दूर भगा दे।

पुस्तकों में तेरा वास है माँ,

हर शब्द में तेरा अहसास है माँ,

न चाहिए चांदी, न सोना मुझे,

बस मिल जाए विद्या का दान मुझे।

हाथ जोड़कर खड़ी द्वार पर,

अपनी करुणा की छांव दे दो ।

मेरी लेखनी में एक ताक़त भर दो ,

भटक रहा जो राह जगत में ।

उसको शिक्षा का पाँव दे दो,

उसको ज्ञान का भंडार दे दो माँ ।।

 

रचनाकार ज्योती वर्णवाल

नवादा (बिहार)