दुराचार, पापाचार करने वाले सभी धुंधकारी

दुराचार, पापाचार करने वाले सभी धुंधकारी

श्री बाबा झुंगीनाथ धाम में 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा

बस्ती। श्री बाबा झुंगीनाथ धाम में 7 दिवसीय सरस संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा एवं श्रीश्री विष्णु महायज्ञ और सन्त सम्मेलन में व्यासपीठ से कथा के दूसरे दिन कथा व्यास दामोदर दास जी महाराज ने कहा कि अपने माता पिता का अनादार कर दुराचार और पापाचार करने वाले सभी धुंधकारी हैं। जिन हाथों से श्रीकृष्ण की सेवा न हो, जो हाथ परोपकार न करें वे हाथ शव के समान हैं। तन और मन को दण्ड दोगे तो पाप का क्षय होगा। जिसके चरित्र को देखने मात्र से ही घृणा हो वहीं धुंधकारी है। वह अपने कुकर्मो से प्रेत बनता है । गोकर्ण जैसा भाई और भागवत ही प्रेत योनि से मुक्ति दिला सकते हैं। श्रीमद्भागवत मुक्ति की कथा है।

महात्मा जी ने कलयुग के प्रवेश, धर्म के दुःखी होने, नारद के प्रयास और परमात्मा के अवतारों का विस्तार से वर्णन करते हुये कहा कि भागवत कथा के श्रवण से वासना की ग्रन्थियां टूटती है। वैकुण्ठ में जो आनन्द है वही भागवत कथा में मिलता है।

यज्ञाचार्य, मनोज पाण्डेय ने विधि विधान से पूजन अर्चन कराया। यज्ञ के आयोजक पं0 धु्रवचन्द्र पाठक व यज्ञ यजमान डी.एम.तिवारी (पूर्व नौसैनिक),उदय नारायण पाठक, उर्मिला त्रिपाठी, (मंदिर पुजारी) शीतला गोसाई, देवी प्रसाद गोस्वामी, सीता पाठक, रंजना पाठक , सुधांशु पाठक, अंकुर पाठक , शुभम् पाठक , भावेश पाण्डेय , माता बदल, उदय नारायण पाठक , महेंद्र पाठक , सुधांशु पाठक, शुभम पाठक , रंजना पाठक , सीता पाठक , राघवेंद्र पाठक व क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।