शराब पीकर और पिलाकर भारत विश्व गुरु कैसे बन सकता है?-संत उमाकान्त महाराज

*शराब पीकर और पिलाकर भारत विश्व गुरु कैसे बन सकता है?-संत उमाकान्त महाराज*

*कोशिश तो हो रही है लेकिन अगर शिव जी महाराज नहीं माने तो कितना विनाश होगा कुछ कह नहीं सकते*

( खजुराहो ) मनुष्य द्वारा जान – अंजान में बनते पाप कर्मों की आगे मिलने वाली कठोर सजा से बचने के लिए अपने सतसंग के माध्यम से समाज को सही दिशा देने वाले खजुराहो के बमीठा में उमड़े भक्तों की भारी भीड़ को सतसंग सुनाते हुए बताया कि
प्रेमियों ! धीरे-धीरे परिस्थिति बदलती चली जा रही है, खराब समय आता चला जा रहा है । यह ठगी लालच पहले इतनी नहीं थी, यह कामवासना जो अपनी मां बहन को आदमी नहीं पहचान पा रहा है। यह वह भूमि है जो जननी सम जानहि पर नारी, धन पराव विष थे विष भारी। जहां दूसरे के धन को लोग जहर की तरह मानते थे, जहां दूसरे की मां बहन को अपनी मां बहन की तरह समझते थे। आज समाज का क्या हाल है इस समय बच्चों और बच्चियों का चरित्र गिरता चला जा रहा है सोचो। इस देश का क्या होगा धार्मिक देश भले कोई कुछ कहता रहे जिस देश में नारियां शराब पियेंगी, जिस देश के नौजवान शराबी कबाबी शबाबी हो जाएंगे। जिस देश के लोग होश में नहीं रहेंगे, वह देश धार्मिक देश नहीं कहला सकता । विश्व गुरु नहीं बन सकता है। इस पर बुद्धिजीवियों को विचार करने की जरूरत है इनके खान-पान और चाल चलन सही करने की जरूरत है ।

*छोटे चींटी से लेकर मनुष्य में सभी में परमात्मा की अंश जीवात्मा है*

जब धर्म के हानि होती है लोग दु:खी होते हैं सदाचार त्याग की भावना खत्म होने लगती है जब समय पर जाड़ा गर्मी बरसात नहीं होता है प्रकृति नाराज हो जाती है ऐसे समय पर कोई ना कोई महापुरुष के रूप में इस धरती पर भेजा जाता है और वह अपना काम करता है धर्म की स्थापना करता है पहले तो एक ही धर्म था मानव धर्म क्योंकि हर मानव में प्रभु के अंश जीवात्मा है।

*धर्म की स्थापना कब होगी*

इतिहास बता रहा है कि जब-जब ऐसे महापुरुष आए धरती पर, उन्होंने किसी इंसान के लिए काम किया । ना हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई के लिए ना ब्राह्मण, क्षत्रिय के लिए बल्कि सबके लिए काम किया । जब इंसानियत मानवता आ जाती है जब लोग सत्य बोलते हैं जीवों की हिंसा हत्या नहीं करते हैं। जब परोपकार लोगों के अंदर रहता है एक दूसरे की मदद करते हैं। सेवा भाव रहता है तो धर्म की स्थापना हो जाती है।