हर्ष भरा नववर्ष – ज्योती वर्णवाल

#दैनिक रचना प्रतियोगिता

#दिनांक-५-१-२०२६

#दिन-सोमवार

#विषय-हर्ष भरा नववर्ष

#विद्या-कविता

 

कविता: हर्ष भरा नववर्ष

एक उत्साहित बालक सा, आनंदित अति हर्ष,

द्वार पर उल्लास से, दस्तक देता नववर्ष।

मन में बसती है उमंग, बस्ते में बढ़ता विश्वास,

हर महीना विशेष है, हर दिन में नया अहसास।

पन्ने भले ही अलग हों, पर अध्याय सभी हैं साथ,

समय की गति निराली, कुदरत की अनूठी बात।

लीप वर्ष की गणना में, जब छिप जाता एक दिन,

अनुभवों की धूप-छाँव में, जीवन नहीं है खिन्न।

तपा-भुना जब स्वर्ण सा, अनुभव का रंग समाया,

प्रकृति लिखती पन्नों पर, नवजीवन की सुंदर छाया।

सागर और हरीतिमा ने, बिछाई है धानी चादर,

लताओं के बंधन सजे, पुष्पों के खिले हैं झालर।

कोयल की मीठी कूक से, गूंज रहा है पावन गान,

मंगलमय संक्रांति संग, उदित हुआ नव सूर्य महान।

सब स्वस्थ रहें और मस्त रहें, नव हर्ष का उत्कर्ष हो,

जीवन के हर एक क्षण में, मंगलमय नववर्ष हो।

 

ज्योती वर्णवाल

नवादा (बिहार)