दुर्गा नगर कटरा में रुक्मणी व श्रीकृष्ण विवाह की निकली मनमोहक झाकी, थिरके श्रद्धालु
बस्ती। समीक्षा खुद की, परीक्षा अपनों की एवं प्रतीक्षा ईश्वर के कृपा की करनी चाहिए। लेकिन यह बिना सत्संग के संभव नहीं है। जहां रामकथा जीवन जीने की कला सिखाती है वहीं श्रीमद्भागवत कथा हमें मोक्ष प्रदान करती है।
यह सदविचार अयोध्या धाम से पधारे अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक मुक्तामणि शास्त्री ने दुर्गा नगर कटरा में चल रही नौ दिवसीय भागवत कथा के प्रवचन सत्र में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण लीलामृत के महारास में जीवात्मा का परमात्मा से मिलन हुआ, जीवात्मा और परमात्मा के मिलन को ही महाराज कहा गया है। जब जीव में अभिमान आ जाता है तब भगवान दूर हो जाते है लेकिन जब कोई अनुराग के विरह में होता है तो उससे मिलकर दर्शन भी देते हैं।
रुक्मणी विवाह की कथा को विस्तार देते हुए कि रुक्मणी के भाई ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ सुनिश्चित किया था, लेकिन रुक्मणी ने संकल्प लिया था कि वह शिशुपाल को नहीं केवल गोपाल को पति के रूप में स्वीकार करेंगीं। शिशुपाल असत्य मार्गी है। द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण सत्य मार्गी है। इसलिए वो असत्य को नहीं सत्य को अपनाएगी। अंततः भगवान श्रीद्वारकाधीश ने रुक्मणी के सत्य संकल्प को पूर्ण किया। श्री कृष्ण व रुक्मणी के विवाह की झांकी निकली और श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। बराती गाजे बाजे के साथ खुशी में जम कर नाचते दिखे। अधिकांश भक्तों के आंखों से आंसू भी छलक उठा।
कथा में कार्यक्रम आयोजक प्रमोद पांडेय, पूर्व विधायक रवि सोनकर, एडवोकेट फूलचंद पांडेय, आशाराम, राजन पांडेय, संतोष गुप्ता, सूर्य प्रकाश शुक्ला, विपुल पांडेय अनिल श्रीवास्तव केडी पांडेय सहित तमाम लोग मौजूद रहे।