मोबाइल एक लत – नेहा वार्ष्णेय

*मोबाइल एक लत*

 

सुना था “science is a good servent but a bad master”

आज महसूस होने लगा है, हर तरह प्रगतिशील विज्ञान बाहें फैलाए खड़ा है l

उसमें भी सबसे ज्यादा मोबाइल फोन, मानो जैसे पूरी दुनिया इसी में सिमटकर रह गयी है l

मोबाइल फोन के आने से पहले यह सुविधा थी कि घर से बाहर निकलते ही पत्नी की चिक चिक से छुटकारा मिल जाता था, मोबाइल का आविष्कार होते हैं यह सुविधा भी समाप्त हो गई l

मुझे आज भी याद है जब नया नया फोन आया था तब पत्नी जब मर्जी फोन मिलाकर पूछती थी कि कहां हो, तब मैंने कह दिया की गाड़ी चला रहा हूं, उसने तुरंत कहा कि हॉर्न बजा कर दिखाओ, पत्नी की बात का जवाब देने के लिए मैंने अपने मुंह से पौ-पौ की आवाज निकालना सीख लिया , अब वीडियो कॉल की सुविधा से तो अब सीधा वीडियो कॉल करके ही चेक करती है l

वीडियो कॉल की सुविधा आने पर झूठ बोलने का स्पेस ही नहीं बचा l

शुरुआत में फिर भी ₹12 की कॉल होती थी, पर आज भारत में सबसे सस्ता मोबाइल फोन ही है lभारत की इतनी जनसंख्या नहीं जितने मोबाइल फोन है l

 

एक दौर था जब घर में लैंडलाइन फोन होता था, तो घर के सभी लोग उसी से एक ही जगह खड़े होकर बात करते थे, फिर कोडलेस आ गया कि आप थोड़ी दूरी से बात कर सकते हो l उसके बाद तो मोबाइल के आते ही सारी टेंशन ही खत्म, आराम से बात privacy के साथ कर सकते हो, फिर भी कॉल महंगी होती थी तो इतना भी बात नहीं कर सकने की गुलामी थी परंतु talktime फ्री होना तो जैसे आजादी की नई परिभाषा बन गया l

 

आज फोन ने दूर वालों को पास कर दिया है और आसपास के लोगों को दूर l

पहले किसी को अमेरिका जाना होता था तो उसे पूरा परिवार एयरपोर्ट छोड़ने जाता था, छोड़ने वालों की और आने जाने वालों की आंखें नम होती थी l आजकल तो घर से कार में बैठते ही जाने वाला और घर वाला दोनों ही अपने फोन में बिजी हो जाते हैं और घर वाले अपने व्हाट्सएप चेक करने लगते हैं l

किसी को किसी से कोई सरोकार नहीं रह गया है l मोबाइल सुविधा की तरह जीवन में आया था और लत की तरह चिपक गया है रात में जब तक फोन की बैटरी खत्म ना हो जाए तब तक नींद नहीं आती l मोबाइल की बैटरी खत्म हो जाए तो ऊपर से लाइट भी चली जाए तो आदमी की हालत ऐसी हो जाती है जैसे आईसीयू में पड़े हो l

पहले लगता था कि कोई मिल जाए तो टाइम पास हो, आजकल कोई मिल जाए तो लगता है चला जाए ताकि हम अपने फोन पर टाइम पास कर सके l

एक पत्नी का मोबाइल किसी रिश्तेदार के घर छूट गया, मोबाइल के बिना बेचारी को 3 घंटे तक पति से बातचीत करनी पडी, तब उसे पता चला कि उसका पति भी कोई खराब आदमी नहीं है l

सुबह सुबह आंख खुलते ही फोन ना मिले तो जैसे हार्ट अटैक जैसा आने को होता है l आजकल किसी को नुकसान पहचाना हो तो बस उसका फोन चोरी कर लो, इंसान पागल हो जाएगा l

इस विषय में बस यही कहना चाहती हूं कि अपनी इच्छाओं को सीमाओं में बंधे रखिए वरना यह शौक गुनाहों में बदल जाएंगे l अब आपका अकेलापन आदमियों से नहीं दूर नहीं होता बल्कि रील से दूर होता है l

 

धन्यवाद

नेहा वार्ष्णेय “धारा”

दुर्ग छत्तीसगढ़