लखनऊ उत्तर प्रदेश के आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं खाद्य सुरक्षा तथा औषधि प्रशासन राज्य मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने सोमवार को राष्ट्रीय आयुष मिशन कार्यालय स्थित सभागार में प्रदेश के समस्त आयुष मेडिकल कालेजों—आयुर्वेद, यूनानी एवं होम्योपैथिक—के प्रधानाचार्यों एवं विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में मंत्री ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी सुविधाएं एवं स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों को स्पष्ट किया कि छात्रों की पढ़ाई में किसी प्रकार की शिथिलता न हो। इसके लिए प्रत्येक कालेज में वार्षिक शिक्षण कैलेण्डर तैयार कर शिक्षण की पुख्ता व्यवस्था की जाए। साथ ही, छात्रों को नवीनतम ज्ञान से जोड़ने के लिए समय-समय पर सेमिनार आयोजित किए जाएं।मंत्री ने कहा कि छात्रावासों की समस्याओं को चिन्हित कर त्वरित निस्तारण कराया जाए। कालेज परिसर में स्वच्छता को प्राथमिकता पर रखा जाए, ताकि छात्रों को अनुकूल शैक्षणिक वातावरण मिल सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि ओपीडी में आने वाले मरीजों के लिए दवाओं की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, और निर्माणाधीन कार्यों को बिना विलंब के पूर्ण कराया जाए।डॉ. दयालु ने विशेष रूप से 50 शैय्या वाले आयुष अस्पतालों में शुद्ध पेयजल और निर्बाध विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में मरीजों की सुविधा के लिए वाटर कूलर लगवाए जाएं और नियमित स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाए, जिससे अधिकाधिक लोगों को लाभ मिल सके।उन्होंने सभी चिकित्सालयों में औषधीय एवं छायादार पौधों का रोपण कर हरियाली बढ़ाने के निर्देश भी दिए। साथ ही, दवाइयों की आपूर्ति में व्यवधान न आए, इसके लिए समय से पूर्व ही मांग पत्र भेजने की व्यवस्था लागू करने को कहा। अस्पताल परिसरों की स्वच्छता व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया।प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बैठक में विभाग की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और भरोसा दिलाया कि मंत्री द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का पूर्ण पालन किया जाएगा। बैठक में विशेष सचिव हरिकेश चौरसिया, महानिदेशक आयुष एवं निदेशक आयुर्वेद मानवेन्द्र सिंह, निदेशक होम्योपैथिक डॉ. ए.के. वर्मा, निदेशक यूनानी प्रो. जमाल अख्तर सहित प्रदेश के सभी आयुष मेडिकल कालेजों के प्रधानाचार्य एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।डॉ. दयालु ने बैठक के अंत में कहा कि प्रदेश में आयुष चिकित्सा की छवि और गुणवत्ता को बेहतर करने की दिशा में सभी अधिकारी संकल्पित भाव से कार्य करें, ताकि आयुष प्रणाली को मुख्यधारा में और अधिक मजबूती से स्थापित किया जा सके।