
अनुराग लक्ष्य 7 अप्रैल
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
मुंबई की सरजमीन पर यूं तो हज़ारों शायर हैं जिनसे मेरी मुलाकात और बात होती रहती है, लेकिन सबसे ज्यादा अगर किसी ने सलीम बस्तवी अज़ीज़ी को मुतास्सिर किया तो वोह हैं शायर इमरान गोंडवी साहब जो अक्सर मुझसे किसी न किसी मुशायरे में मुंबई की सरजमीन पर मिल ही जाते हैं। बेहद संजीदा मेज़ाज और मुहब्बत से लबरेज़ है उनकी शख्सियत जो किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं। आज उन्हीं की एक यादगार और खूबसूरत ग़ज़ल लेकर हाज़िर हो रहा हूँ इस उम्मीद के साथ कि आप को जरूर पसंद आएगी ।
1/ इंसानियत के बाब का उन्वान है वालिद,
इंसान नहीं, इंसान वोह, इंसान है वालिद ।
2/ कुरआन के अवराक को गिरदान को देखो,
यज़दां नहीं पर मर्ज़ी ए यज़दान है वालिद ।
3/ एक गाम उसकी राह पे खुद चलके देखिए,
कहने के लिए तो बड़ा आसान है वालिद ।
4/ सारी बुलंदियों की जहां से है इब्तिदा,
उस मसनद ए अजीम का सुल्तान है वालिद ।
5/ अलहम्द से वन्नास तलक पढ़ के देख लो,
तखलीक ए कायनात में ज़ीशान है वालिद ।
6/ इस वास्ते क़दमों में है माँ के मेरी जन्नत,
क्योंकि मेरी जन्नत का निगहबान है वालिद ।
7/ सूरत में हो सीरत में हो या कौल ओ फेल में,
दरअसल तू अवलाद की पहचान है वालिद ।
8/ थक हार के हालात से खामोश है इमरान,
बच्चे भी समझते हैं पशेमान है वालिद ।