नवीन छंद – चौपाला छंद 

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18 मात्रा का यह नवीन छंद मेरे (डा. ओम प्रकाश श्रीवास्तव) द्वारा सृजित किया गया है।इस छंद में दो-दो पंक्तियों में तुकांत देखा जाता है तथा अंत में चौकल अनिवार्य है। यगण (121) अंत में निषेध है।शेष सामान्य नियम छंद के यथावत हैं।।

 

अच्छे कर्मों का आयुध न्यारा।

हरदम देता अनुपम फल प्यारा।।

 

शान मान यह अति पावन देता।

सारे कंटक पथ से हर लेता।।

 

भक्ति-शक्ति का जो आयुध पाता।

जीवन उसका स्वर्णिम बन जाता।।

 

ईश-कृपा है नित उस पर रहती।

सुख-वैभव की सत गंगा बहती।।

 

ज्ञान-बुद्धि का जो आयुध पाए।

पास सफलता खुद उसके आए।।

 

खुशियाँ जीवन में करें बसेरा।

वैभव लक्ष्मी का रहता डेरा।।

 

युद्ध-भूमि में जो आयुध होते।

बीज सदा ही हिंसा का बोते।।

 

सैनिक कर में जब आयुध रखते।

दया-भाव को तब कम ही लखते।।

 

डॉ ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम

कानपुर नगर