हमको इमरान आज़माओ मत, हमको बस आपसे मुहब्बत है, इमरान गोंडवी,,,,,


अनुराग लक्ष्य, 2 मार्च
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
मुंबई की सरजमीन पर अदबी महफिलों और अदबी हलकों में एक नाम हमेशा बहुत ही सम्मान से पुकारा जाता है और वोह नाम है शायर इमरान गोंडवी साहब का। जो हमेशा अपनी मेयारी ग़ज़लों और गीतों के ज़रिए आवाम में काफी चर्चित हैं। आज उनकी एक खास ग़ज़ल के साथ हाज़िर हो रहा हूं, समाद फरमाएं।
यह फसाना नहीं हकीकत है ,
प्यार इंसान की ज़रूरत है ।
आप अपना मुझे कहें न कहें,
मुझको तो आपसे मुहब्बत है ।
मुझपे तेरे सितम जो चलते हैं
मेरे हमदम तेरी इनायत है ।
आपसे इश्क हो गया है मुझे,
क्या मेरी बात में सदाकत है ।
हर तरफ़ है जो गर्मी ए महशर,
आपके हुस्न की तमाज़त है ।
सारा इलज़ाम उनका सर मेरे,
मुझसे फिर भी उन्हें अदावत है ।
इसलिए हम तुम्हें नहीं भूले,
भूल जाना तुम्हारी आदत है ।
हमको ,इमरान, आज़माओ मत,
हमको बस आपसे मुहब्बत है ।
इस तरह की मेयारी ग़ज़लों से इमरान गोंडवी साहब हमेशा रूबरू होते रहते हैं। जिसकी वजह से उन्हें मुशायरों और कवि सम्मेलनो में हमेशा बुलाया जाता है।