🌹 *ओ३म्* 🌹
*जन्म दिवस संस्कार*
मानव के निर्माण में *संस्कृति-संस्कार व सभ्यता* का बहुत बड़ा योगदान है।


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*संस्कृति क्या है?*
संस्कृति का जन्म स्वयं परमात्मा से होता है।ईश्वर जीवात्माओं के कल्याण के लिए जब सृष्टि को बनाता है उस समय उस सृष्टि में जीने का एक *संविधान* भी बनाता है। उस संविधान के द्वारा मनुष्य *इहलोक से परलोक* की यात्रा को सहज भाव से प्राप्त कर लेता है।उस संविधान का नाम है *ईश्वरीय वाणी वेद* इसी ईश्वरीय वाणी वेद को मानव मात्र के लिए ऋषियों द्वारा अनवरत रुप से प्रवाहित किया गया इसी का सूत्र बीज है संस्कृति जिसका संपूर्ण नाम है *सत्य सनातन संस्कृति* इसके बाद जो मानव द्वारा स्वतंत्र रुप से चलाई ग ई हैं उन्हें कहते हैं *मत,पंथ,मजहब,संप्रदाय* इनमें ईश्वरीय संविधान की चादर ओढ़ी तो जाती है लेकिन प्रमुखता *व्यक्ति विशेष* की रहती है।
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*संस्कार क्या है?*
संस्कार वह वैज्ञानिक प्रकृया है जिसके द्वारा *मानव के दुर्गुण-दुर्व्यसनों व न्यूनता* को परिमार्जित किया जाता है और *सद्गुणों* का बीजारोपण किया जाता है। इस कार्य में *आचार्य,यजमान,यज्ञ,वेदोपदेश* मुख्य होते हैं।
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*सभ्यता क्या है?*
मानव की दैनिक उत्तम दिनचर्या सहित *उठने-बैठने-बोलने व सामाजिक व्यवहार* को सभ्यता कहते हैं।
इसी क्रम में *विकास भवन डी कोठी बाराबंकी* में जन्म-दिवस संस्कार जो पारंपरिक लोक व्यवहार में आता है।उसे *वैदिक व्यस्था* का रुप दिया गया। क्योंकि १६ संस्कारों में ये नहीं आता है।
🌻 *संस्कार यज्ञमान*🌻
*ब्रह्मचारिणी महिमा
🏵️ *अभिभावक*🏵️
*[१]* शिव कैलाश वर्मा जी।
*[२]* नीतू वर्मा जी।
ब्रह्मचारिणी महिमा ने जीवन के *पांच वसंत* पूरे किए।अब वह छठे वर्ष में प्रवेश कर ग ई है।इस अवसर उसने अपने *जन्मोत्सव* पर निम्न कार्यक्रम किए।
(१) आचमन,अंगस्पर्श
(२) गायत्री एवं अन्य आयुष्मान मंत्रों से यज्ञ में आहुति प्रदान किया।
(३) गायत्री मंत्र उपस्थित जन समुदाय को सुनाया व अर्थ याद करने का भी संकल्प किया।
(४) उपस्थित अतिथियों का अभिवादन करके *वेद की ऋचाओं* से आशीर्वाद प्राप्त किया।
(५) संस्कृत भाषा में सभी ने *तव जन्म दिनम् शुभ हे!* कहकर उसे जन्म दिवस की शुभ कामनायें दी।
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*क्या नहीं किया?*
पुत्री महिमा ने अपने जन्म दिवस पर निम्न कार्यों को नहीं किया।
*[१]* महिमा ने इस अवसर पर गुब्बारे (वैलून) नहीं लगाए।
*[२]* चर्बी वाली मोमबत्ती न जलाई न ही बुझाई अपितु *घी का दीपक* जलाया।
*[३]* महिमा ने इस अवसर पर *केक भी नहीं काटा* अपितु सबको *प्रीति भोज* कराया।इस प्रकार से
एक दिब्य संदेश दिया कि *सनातन संस्कृति* को सभी इसी प्रकार अपने घरों पर लायें!
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*अतिरिक्त कार्यक्रम*
यज्ञ के उपरांत *पंडिता रुक्मिणी शास्त्री* जी वैदिक भजन व उपदेश हुआ। श्रीमती *रंजना अवस्थी* जी ने मधुर ढोलक से संगति की।पुनश्च *वेदमंत्रों से जीवन जीने की कला* पर उपदेश हुए।
🍁 *कार्यक्रम संयोजक*🍁
डाक्टर सुरेश वर्मा जी
🍁 *यज्ञ-व्यवस्था*🍁
(१)गणेश मुनि जी पिलीभीत।
(२) राम प्रताप जी बाराबंकी।
इस अवसर पर *ग्राम घेरी व ग्राम शाले नगर* से श्रीमान हरेंद्र सिंह जी।श्री रामसुजान जी। श्री रमेश त्रिपाठी।श्री कृष्ण चंद्र त्रिपाठी जी ने भी सहभागिता की। डाक्टर टी एन वर्मा भी अपने सह-योगियों संग उपस्थित रहे।अन्य स्थानीय निवासियों ने भी *यज्ञ-सत्संग* में प्रतिभाग किया और वैदिक विधि से मनाये गये जन्म दिवस को हृदय से आत्म सात किया।
*आचार्य सुरेश वैदिक प्रवक्ता*
आर्यावर्त्त साधना सदन पटेल नगर दशहरा बाग बाराबंकी उत्तर प्रदेश