पूर्वाचार्य कन्हैया दास की तृतीय पुण्यतिथि मठ प्रांगण में श्रद्धापूर्वक मनाई गई।

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयाेध्या संत समिति अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी महाराज सनातन वैदिक परंपरा के ध्वजावाहक रहे। उन्हाेंने जन-जन में श्रीराम के प्रति लाेगाें काे जगाने का कार्य किया। वह श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में बचपन से जुड़े रहे। उक्त बातें रामकाेट स्थित प्रतिष्ठित पीठ देवराहा बाबा का स्थान सनकादिक आश्रम के वर्तमान पीठाधिपति श्रीमहंत संताेष दास ने कही। अवसर था मंदिर के पूर्वाचार्य कन्हैया दास महाराज के तृतीय पुण्यतिथि महाेत्सव का। जाे मंगलवार को मठ प्रांगण में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। संताें ने उनकाे निष्ठापूर्वक याद किया। मंदिर के वर्तमान महंत ने आगे कहा कि श्रीरामजन्मभूमि जीर्णाेद्धार के लिए महाराज श्री ने देश-विदेश में लाेगाें काे जगाया। अपने जीवनकाल में वह श्रीरामजन्मभूमि जीर्णोद्धार का कार्य नही देख पाए। लेकिन जहां कहीं भी हाेंगे वहां से अवश्य देखा हाेगा। भगवान के श्रीचरणों में उनकाे स्थान प्राप्त है। इस दिव्य धाम में 5 साै वर्षों बाद भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण और उसमें रामलला विराजमान हुए। राममंदिर निर्माण से गुरुदेव का सपना साकार हुआ। वहीं वेदमंदिर पीठाधिपति श्रीमहंत रामनरेश दास महाराज ने कहा कि महंत कन्हैया दास रामायणी हमारे परम प्रिय दाेस्त रहे। जैसे- भगवान श्रीकृष्ण के सुदामा परम मित्र थे। उसी प्रकार वह प्रिय मित्र था। आज हमकाे उनकी बहुत याद आती है। महाराज श्री की कमी खल रही है। भगवान ऐसे महापुरुषाें को शांति प्रदान करें। इससे पहले संताें ने साकेतवासी महंत के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। अंत में पीठ के वर्तमान श्रीमहंत संताेष दास एवं अधिकारी रामदास ने पधारे हुए संत-महंतों का स्वागत-सत्कार किया। पुण्यतिथि पर मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, चतुर्भुजी मंदिर के महंत शैलेष दास, रामचरित मानस भवन के महंत अर्जुन दास, सरयूकुंज पीठाधीश्वर महंत राममिलन शरण, लालसाहेब दरबार के महंत रामनरेश शरण, छत्तीसगढ़ आश्रम के महंत रामेश्वर दास, महंत अमर दास, महंत रामदास, महंत श्रीकांत शरण, माेहन दास, रामायणी गाेवर्धन दास, संतदास आदि संत-महंत माैजूद रहे।