धन तेरस है धन्वंतरि -आचार्य सुरेश जोशी

🔥 *धन तेरस है धन्वंतरि*🔥

वो संस्कृति मिट जाती है जिसके अनुनाई अपने * *पूर्वजों का इतिहास भूल जाती है* आज की हिंदू जाति केवल खाने -पीने-मौज उड़ाने में मस्त है। इसलिए लोग इतिहास की सच्चाई से अनभिज्ञ है।
आज के दिन आयुर्वेद के महान पंडित *महर्षि धन्वंतरि* का अवतरण दिवस है। *धनतेरस व महर्षि धन्वंतरि* का भ्रमजाल ने कैंसे विकृत किया सनातन धर्म को ध्यान से इस लेख को पढ़िये।
*लोक-मान्यतायें!*

लोक में ऐसा प्रचलन है कि आज के दिन स्वर्ण🌸चांदी🌸 तांबे 🌸आदि की खरीदी करना शुभ होता है। इसलिए लोग जमकर आभूषण🏆बर्तन 🚘 इत्यादि अन्य सामग्री खरीदते हैं।
*धनतेरस-क्या है?*

धनतेरस में दो शब्द है…
पहला है *धन* जिसका सामान्य अर्थ लगाया जाता है – पैसा🍁रुपया🍁सोना🍁 चांदी आदि और
दूसरा है *तेरस* जिसका अर्थ है – *त्रयोदशी!*
अर्थात्
“धनतेरस” के दिन त्रयोदशी तिथि होती है।

कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस मनाया जाता है। आधुनिक पंचांगों
के अनुसार पर। विचारणीय है।
पर त्रयोदशी को स्वर्ण आदि आभूषण खरीदने से क्या लाभ और शुभ है?
🦌🦌🦌🦌🦌🦌
क्या साल भर ज्वेलरी आदि की दुकानें बंद रहती है ?
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क्या दूसरे दिन खरीदना अशुभ है ? इसका उत्तर है जी नहीं
जब भी आपके पास ध
न हो आप उसी दिन
खरीद सकते हैं।
तो धनतेरस का क्या मतलब ?
*अति-विचारणीय विंदु*
धन शब्द के बहु अर्थ
हैं ।धन का सबसे पहला अर्थ है –
*पहला सुख निरोगी काया* ।
*दूसरा सुख घर में हो माया !!*
यहां पर आप ध्यान दें
*माया* तो दूसरे स्थान पर है।
पहली संपत्ति तो हमारा 💀शरीर💀ही है।

आपसे कोई आपका एक 💪 *हाथ*💪 मांग ले और बदले में कई *लाख रुपए* देने की बात कहे तो, आप कदापि स्वीकार नहीं करेंगे। यही सत्य भी
है कि आप अमूल्य हैं
इसका मतलब पहला धन तो *आपका शरीर ही है*, इससे बड़ा धन कुछ नहीं है।

अब आप पूछेंगे ?
इसका धनतेरस से क्या मतलब है,?
*आओ!इसका पता करें ?*
आयुर्वेद के बहुत बड़े ज्ञाता ऋषि हुए हैं *धन्वंतरि* और उन्होंने अपनी बात प्रारंभ की है, शरीर रूपी धन से।इस पर
आपको विचारना है।
आयुर्वेद मनीषी धन्वन्तरि ने *शरीर* को सबसे बड़ा धन बताया है।इससे यह
बात स्पष्ट हो ग ई है।
इसलिए पहला धन तो शरीर हीं है। आप सोचें
यदि आप *स्वस्थ रहें, निरोग रहें* तो संपत्ति बहुत कमा सकते हैं!
इस पर आपने भी वो
कहावत तो आपने सुनी है कि भाई साहब
जान है तो *जहान* है। यदि यह बात सही
है तो आपको इसी सम
य यह मान लेना है कि आपका पहला धन *शरीर* ही है।इतना
ही नहीं इसमें और कहें
आपका सुंदर स्वास्थ्य ही *आपका धन* है।
मित्रो! इस प्रकार से
आयुर्वेद के🪷 महर्षि धन्वंतरि🪷 के स्मरण में हम त्रयोदशी को *धनतेरस* मनाते हैं।
इतना ही नहीं और भी
*शरद ऋतु* में शरीर का ध्यान रखना यह आयुर्वेद के अनुसार भी बहुत जरूरी है, क्योंकि शरद ऋतु में ध्यान रखा गया शरीर पूरे साल भर स्वस्थ रहता है। वेद भगवान
ने भी उपदेश किया है
*जीवेम शरदः शतम्* अब जरा सोचें
इस मंत्र-भाग में शरद शब्द का उल्लेख है अर्थात् *हम सौ वर्ष तक जियें। हम सौ शरद ऋतु देखें।* परन्तु शरद ऋतु की उपेक्षा करके कोई व्यक्ति सौ वर्ष तक नहीं जी सकता। इसीलिए हमारा पहला धन शरीर है।इतना ही
नहीं एक बात और भी
ध्यान रहे ! हमारा पहला धन शरीर है, परंतु व्यक्ति संपत्ति कमाने के लिए इस *अनमोल शरीर* और मानव जन्म को दांव पर लगा देता है। फिर शरीर ठीक करने के लिए पूरी संपत्ति को गवां देता है। इसलिए आइए असली धन को समझें और धनतेरस ऐसे ही मनाएं जिससे
सत्य समझ में आये ।
कालांतर में लोगों ने *स्वर्ण आभूषण, रत्नादि* को हीं बड़ा धन मान लिया।
अब आप यह सोचें कि
आपको महान 🥑आयुर्वेदाचार्य महात्मा धन्वन्तरी🥑जी के जन्मदिवस पर आयुर्वेद को घर पर लाने के लिए पांच काम करने हैं।
[१] शरीर को स्वस्थ रखने के लिए *व्यायामशाला यज्ञशाला और भी अनेक पाठशालाओं* में जाना होगा।
[२] मन को स्वस्थ रखने के लिए *प्राणायाम व सत्यआचरण* करना होगा।
[३] बुद्धि को स्वस्थ रखने के लिए *वैदिक विद्वानों का सत्संग* करें और पंडों से बचना होगा।
[४] आत्मा को स्वस्थ रखने के लिए *परमात्मा* का ध्यान करना होगा।
[५] ईश्वर को पाने के लिए ईश्वर की सृष्टि में *समर्पण भाव* से रहना होगा ।
*मेरा मुझमें कुछ नहीं।*
*जो कुछ है सब तोर!*
*तोरा तुझको सौंपते ।*
*क्या लागत है मोर।।*
दीपावली के त्योहार का प्रारंभ धनतेरस से होता है। पौराणिक मान्यताओं के आधार पर भगवान धन्वंतरि को अवतार माना जाता है। उनके एक हाथ में कलश है जो लक्ष्मी का प्रतीक मानते हैं।इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा व नये वर्तन खरीदने से घर में लक्ष्मी आती है।
*सत्यता को जानें ?*
वास्तव में धन्वंतरि का ही अपभ्रंश है धनतेरस।इस दिन *भगवान धन्वंतरि* का जन्म हुआ था। महर्षि धन्वंतरि जी *आयुर्वेद के महापंडित* * थे। उनके अनुसार मानव को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन काम करने चाहिए।
(१) व्यायाम (२) प्राणायाम (३) योगाभ्यास (४) ध्यान (५) ऋतुनुकूल आहार व दिनचर्या (६) पर्यावरण शुद्धि हेतु यज्ञ।
जो मानव भगवान धन्वंतरि की इन बातों पर आचरण करते हैं वो १०० वर्ष तक निरोग जीवन जी सकते हैं।
* *हमारा मन्तब्य*
जहां तक मेरा अपना चिंतन है धनतेरस के दिन वर्तन खरीदने से लक्ष्मी आती नहीं बल्कि अधिक लक्ष्मी घर से *हमारी अज्ञानता* के कारण चली जाती है। क्योंकि जो वर्तन सामान्य दिनों में पचास (५०) रुपये में मिल जाता है वो *धनतेरस* के दिन सीधे दुगुने दाम (१००रुपये) में मिलती है।अब आप ही तय कीजिए लक्ष्मी आई कि ग ई।इसे केवल
ज्ञान की दृष्टि से ही
समझें। हां व्यापारियों की मौज रहती है। अच्छे सामान के साथ सड़ा -गला भी सोने के भाव बेच डालते हैं। सालभर का घाटा इस दिन वसूल लेते हैं।
इसके अतिरिक्त *शराब की विक्री* अधिक होती है ।और *जुवारियों की मौज* होती है। *चोरी डकैती* भी इस अवसर पर अधिक होती है। इसलिए ज्ञान का पर्दा खोलिए। *भगवान धन्वंतरि* के बताए आयुर्वेद के उपरोक्त छः बातों पर आचरण करके शरीर को निरोग बनायें।
आप सबको आयुर्वेद के महान *विभूति महर्षि धन्वंतरि* जी की हार्दिक शुभकामनाएं इस आशा के साथ कि आप भी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर यस संकल्प लें कि *पहला सुख निरोगी काया* इसलिए 🪷 *करो योग।रहो निरोग*🪷
आचार्य सुरेश
*वैदिक प्रवक्ता*