लगी दरबार तेरी मैया, देख खड़ी मैं द्वार – अंजना सिन्हा

लगी दरबार तेरी मैया, देख खड़ी मैं द्वार।

दर्शन दे दो अंबे रानी, अब की मांँ इस बार।।

देखो कैसा हाल जगत का ,जीना हुआ दुश्वार।

नहीं सुरक्षित अपनी नारी ,सुखी नहीं संसार

लगी दरबार तेरी मैया, देख खड़ी मैं द्वार।।

लूट रहे हैं एक दूजे को, छाया है अंधियार।

प्रेम नहीं है देख धरा पर ,बन जा तू पतवार।।

जीवन सबका सुख में कर दो भर दो तुम भंडार

लगी दरबार तेरी मैया, देख खड़ी मैं द्वार।।

मात भवानी आस लगाई, बैठी हूंँ इस बार।

एक दूजे में प्रेम रहे अब, कर दो तुम उपकार।।

शरण तिहारे शीश झुकाऊंँ मैं तो बारम्बार

लगी दरबार तेरी मैया, देख खड़ी मैं द्वार।।

सखी अंजना मांग रही है, दे दो मांँ वरदान।

सत्य लिखूंँ मैं चले लेखनी ,इतना लो संज्ञान।।

कर्म पंथ से डिगू नहीं मैं, जाऊंँ कभी न हार

लगी दरबार तेरी मैया, देख खड़ी मैं द्वार।।

अंजना सिन्हा “सखी ”

रायगढ़