300 सौ साल पुरानी काठ के फोल्डिंग झूले पर विराजमान होंगे भगवान

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। रंगमहल मन्दिर, राममंदिर के बगल में ही स्थित है ।रंगमहल में भगवान राम को दूल्हे के रूप में सेवा की जाती हैं । हरियाली के प्रतीक सावन की शुरुआत के साथ ही मधुर उपासना के प्रसिद्ध स्थान रंगमहल व सद्‌गुरु सदन में झूलनोत्सव की शुरुआत हो गई है। गुरु पूर्णिमा से सावन पूर्णिमा तक चलने वाले इस उत्सव को लेकर हर मंदिर में आचार्यों की स्थापित अलग-अलग परम्परा है, उसी परम्परा का निर्वाह अनवरत हो रहा है। अयोध्या के पौराणिक मंदिरों में शुमार रंगमहल में करीब तीन सौ साल प्राचीन काठ का फोल्डिंग झूला अब भी प्रयोग हो रहा है। इस झूले पर भगवान को विराजित कर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतिदिन
आयोजित किया जा रहा है। मंदिर के महंत रामशरण दास महाराज ने बताया कि आचार्य परम्परा में कृष्ण पक्ष की एकादशी को भगवान के फूलबंगले की भव्य झांकी सजाई जाएगी। वहीं शुक्ल पक्ष की एकादशी को गलबहियां की झांकी सजाई जाएगी। वहीं सदगुरु सदन गोलाघाट में वयोवृद्ध महंत सिया किशोरी महाराज के सानिध्य में रजत झूले पर भगवान को प्रतिष्ठित उत्सव का शुभारम्भ हो गया है। यहां आचार्यों की परम्परा में भगवान के स्वरूपों की झांकी सजाकर प्रतिदिन आचार्यों के रचित पदों का गायन व नृत्य की परम्परा है।

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