जाने कितने सपने पलते, सजना मेरे यार

जाने कितने सपने पलते, सजना मेरे यार।

दरश दिखाओ मेरे साथी, तुम जीवन आधार।।

उमड़ घूमड़ कर बादल गरजे, नाचे देखो मोर।

मेरे दिल की धड़कन भी तो, करती कितना शोर।।

आया सावन बरसे पानी, कर लो मुझसे प्यार

जाने कितने सपने पलते, सजना मेरे यार।।

धानी चुनरी ओढ़े धरती, देख करे श्रृंगार।

धारा मिलन को अंबर आतुर, रहा आज निहार।।

करता तू भी प्रेम हमी से, कर दे तू इजहार

जाने कितने सपने पलते, सजना मेरे यार।।

लगे सुहाना मौसम प्यारा, आओ मेरे पास।

तुमसे है बस मेरी दुनियांँ, तुम ही हो बस इस।।

देखूंँ तुमको झंकृत होते, मेरे दिल के तार

जाने कितने सपने पलते, सजना मेरे यार।।

अंजना सिन्हा “सखी ”

रायगढ़

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